
नर्मदापुरम / केर पूजा भारत के त्रिपुरा राज्य का एक प्रसिद्ध और बहुत ही बड़ा आदिवासी त्योहार है। यह खारची पूजा के दो हफ्ते बाद (आमतौर पर जुलाई या अगस्त में) मनाया जाता है।
अर्थ: ‘केर’ शब्द का अर्थ तपस्या या एक तय सीमा/क्षेत्र महोता है।
देवता: यह पूजा वास्तु देवता के संरक्षक देवता ‘केर’ को समर्पित है, जो लोगों की रक्षा करते हैं।
बांस का उपयोग: इसमें हरे बांस के डंडों से देवता का एक प्रतीक रूप बनाया जाता है।
कड़े नियम और अनुष्ठान
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ढाई दिनों तक बंद: पूजा के दौरान ढाई दिनों के लिए विशेष क्षेत्र या राजधानी अगरतला के प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाते हैं।
प्रतिबंध: इस दौरान लोग जूते नहीं पहन सकते, आग नहीं जला सकते, और ना ही कोई नाच-गाना या मनोरंजन कर सकते हैं।
सुरक्षा: किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को उस क्षेत्र से बाहर भेज दिया जाता है। (संकलन – प्रीति चौहान)

