
नर्मदापुरम / जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने पहुंच रहे आम नागरिकों और परिजनों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए पिपरिया, सोहागपुर, माखन नगर और बनखेड़ी जैसे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। इस बीच, जन्म प्रमाण पत्र शाखा में पदस्थ कर्मचारी द्वारा परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभद्र व्यवहार और काम टालने का आरोप….
अस्पताल पहुंचे परिजनों का आरोप है कि प्रमाण पत्र शाखा में तैनात कर्मचारी नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करते और बार-बार अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड रजिस्टर में जानकारी तलाशने जैसा प्राथमिक कार्य भी कर्मचारी खुद करने के बजाय परिजनों पर ही छोड़ देते हैं।
भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप परिजनों का यह भी कहना है कि अस्पताल में डिलीवरी के समय पर्ची या कंप्यूटर एंट्री में नाम व मात्रा की छोटी-मोटी त्रुटि होने पर उन्हें शपथ पत्र बनवाने या डॉक्टरों से दोबारा लिखवाकर लाने के नाम पर परेशान किया जाता है। आरोप है कि जब तक कोई ‘सेटिंग’ या अनुचित लेनदेन नहीं होता, तब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाते। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह खेल पिछले 2-3 सालों से लगातार जारी है और इसमें कई निचले कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग….
वायरल वीडियो और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्थानीय नागरिकों व परिजनों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से इस पूरे मामले पर संज्ञान लेने की अपील की है। प्रमुख मांगें पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। दूर-दराज से आने वाले नागरिकों के लिए जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।

