
नर्मदापुरम / नगर पालिका के अतिक्रमण रोधी दस्ते की कार्यशैली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सोमवार को उद्योग विभाग से लेकर एसपी ऑफिस और कलेक्टोरेट रोड तक चलाई गई अतिक्रमण रोधी कार्रवाई में प्रशासन का ‘दोहरा चरित्र’ खुलकर सामने आ गया। एक तरफ जहां दोपहर में ईमानदारी से रोजी-रोटी कमाने वाले गरीब कचौड़ी और फल विक्रेताओं के ठेले जबरन हटवा दिए गए, वहीं दूसरी ओर शाम होते ही उसी सड़क पर कब्जा जमाने वाले रसूखदार और वीआईपी ठेलों को साफ छूट दे दी गई।
वसूली के खेल का पर्दाफाश…..
स्थानीय नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि नगर पालिका का अतिक्रमण दस्ता सुबह 8 से दोपहर 4 बजे तक सड़क किनारे दुकान लगाने पर सख्ती दिखाता है। लेकिन शाम 5 बजे के बाद नजारा पूरी तरह बदल जाता है। शाम को लगने वाले 3 से 4 बड़े ‘वीआईपी कोल्ड ड्रिंक और खान-पान के ठेलों से नगर पालिका के कुछ चिन्हित कर्मचारी रोजाना अवैध वसूली हफ्ता कर रहे हैं। पिछले आधा से एक साल से निर्बाध रूप से चल रहा है। कथित तौर पर पूर्व अतिक्रमण प्रभारियों के समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी धड़ल्ले से जारी है। उद्योग विभाग और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने अवैध दुकानें सज जाती हैं। रात के समय यहां असामाजिक तत्वों और भारी जमावड़ा रहता है, जिससे मुख्य सड़क पर हर वक्त जाम की स्थिति बनी रहती है। एसपी ऑफिस और पास के होटलों के ठीक सामने देर रात तक होने वाली इस अव्यवस्था से आसपास के स्थानीय निवासी और राहगीर विशेषकर महिलाएं बेहद असहज और परेशान हैं।
नेहरू पार्क के पास दोबारा खड़ा हुआ अवैध कब्जा…..
गरीबों को निशाना बनाए जाने का सबसे बड़ा सबूत नेहरू पार्क के पास देखने को मिलता है। नेहरू पार्क के अंदर बने एक पक्के अवैध निर्माण को तत्कालीन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने जेसीबी चलाकर ध्वस्त कर दिया था। राजनीतिक दबाव और रसूख के बल पर उस पक्के अवैध कब्जे को दोबारा खड़ा कर दिया गया। छोटे व्यवसायी, जो दोपहर से व्यापार कर रात 8 बजे तक घर लौट जाते थे, उन्हें तो बेदखल कर दिया गया। लेकिन रात 12 बजे तक कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले और हफ्ता देने वाले दुकानदारों पर मेहरबानी हो रही है। लोगों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में स्वयं संज्ञान लेकर नगर पालिका के उन कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है जो हफ्ता वसूली के बदले शहर की सुरक्षा और यातायात को दांव पर लगा रहे हैं।

