

नर्मदापुरम / श्रावण मास में शिवार्चन समिति के तत्वावधान एवं पूज्य गुरुदेव आचार्य सोमेश परसाई के सान्निध्य में विगत 37 वर्षों से आयोजित जनकल्याणार्थ महारुद्राभिषेक के चतुर्थ दिवस श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला। वेद मंत्रों की गूंज, “हर-हर महादेव” के जयघोष और सैकड़ों श्रद्धालुओं की भक्तिमय उपस्थिति में भगवान पार्थिवेश्वर का दुग्ध, दधि, घृत, मधु, शर्करा तथा दिव्य एवं दुर्लभ औषधियों से रुद्राभिषेक किया गया। इसके पश्चात भगवान शिव का बिल्वपत्र एवं विविध पुष्पों से मनोहारी श्रृंगार कर महाआरती संपन्न हुई।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य सोमेश परसाई ने कहा कि “बच्चों के श्रेष्ठ संस्कारों की प्रथम गुरु उनकी माँ होती है। संसार का जो ज्ञान, स्नेह, करुणा, त्याग, अनुशासन और जीवन जीने की कला माँ अपने बच्चों को सहज रूप से प्रदान करती है, वह बड़े-बड़े ज्ञानी और विद्वान भी नहीं दे सकते।”
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों पर निर्भर करता है और बच्चों का भविष्य उनके संस्कारों पर। यदि परिवार में माता-पिता स्वयं धर्म, सत्य, सेवा, संयम और सदाचार का पालन करेंगे तो वही गुण बच्चों के जीवन में स्वतः उतरेंगे। आधुनिक शिक्षा आवश्यक है, किंतु यदि शिक्षा के साथ संस्कार न हों तो ज्ञान अधूरा रह जाता है। माता अपने आचरण से बच्चों में प्रेम, संवेदना, सेवा और सहनशीलता के संस्कार रोपित करती है, जबकि पिता उन्हें कर्तव्य, अनुशासन और जीवन के संघर्षों का सामना करने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए प्रत्येक परिवार का प्रथम दायित्व है कि वह अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़कर उनका सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण करे।
गुरुदेव ने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाकर लौकिक एवं आलौकिक दोनों प्रकार की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में वर्णित 33 कोटि देवी-देवताओं की उपासना मानव जीवन को मंगलमय बनाती है। अपने आराध्य देवों से विमुख होकर अन्य मार्गों का अनुसरण करना धर्म, समाज और राष्ट्र—तीनों के लिए हितकारी नहीं है।
महारुद्राभिषेक के अंतर्गत 21 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान आशुतोष शिव का अभिषेक संपन्न कराया गया। भगवान पार्थिवेश्वर का दुग्ध, दधि, घृत, मधु, शर्करा एवं दिव्य औषधियों से अभिषेक कर बिल्वपत्र, धतूरा तथा विविध पुष्पों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
कल श्रावण का प्रथम सोमवार…..
कल श्रावण के प्रथम सोमवार के अवसर पर भगवान पार्थिवेश्वर की विशेष पूजा होगी। जिसमें भगवान की दिव्य भस्म आरती एवं महाआरती की जाएगी तथा भगवान का सुन्दर मनोहारी श्रृंगार किया जायेगा। श्रावण मास भर प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से आयोजित होने वाले इस महारुद्राभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी होकर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।

