

नर्मदापुरम / सेठानी घाट स्थित गायत्री शक्तिपीठ में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महापर्व श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पर्व के दौरान आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं आध्यात्मिक संस्कारों में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं साधकों ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पर्व के प्रथम दिवस प्रातः 6:00 बजे से साधकों द्वारा गायत्री महामंत्र के अखंड जाप का शुभारंभ किया गया। संपूर्ण शक्तिपीठ परिसर मंत्रोच्चार से भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण में परिवर्तित हो गया। पर्व के मुख्य दिवस प्रातः 8:00 बजे से पंचकुंडी गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों साधकों ने वेदमाता गायत्री, युगऋषि परम पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा का विधिवत आवाहन कर विश्व शांति, मानव कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना के साथ यज्ञ में आहुतियाँ अर्पित कीं।
इस पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ में अनेक मांगलिक एवं आध्यात्मिक संस्कार भी संपन्न कराए गए। विशेष रूप से नवीन साधकों को 39गुरु दीक्षा संस्कार एवं मंत्र दीक्षा प्रदान की गई, जहाँ उन्होंने गुरु सत्ता के संरक्षण में आत्मनिर्माण, परिवार निर्माण एवं समाज निर्माण के लिए नियमित साधना का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ के परिव्राजक अशोक यादव ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए परम पूज्य गुरुदेव के युग निर्माण अभियान, नैतिक जीवन मूल्यों एवं आध्यात्मिक विचारधारा से परिचित कराया। उन्होंने सभी साधकों से गुरु सत्ता के मार्गदर्शन में जीवन जीते हुए समाज सेवा, नैतिक जागरण एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। साथ ही शक्तिपीठ द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारमार्थिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी भी दी।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को बताया गया कि गायत्री शक्तिपीठ, सेठानी घाट में प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से गायत्री महायज्ञ एवं विभिन्न संस्कार निःशुल्क संपन्न कराए जाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक रविवार सायं 5:00 बजे से 6:00 बजे तक परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य वाणी के साथ गायत्री महामंत्र का सामूहिक जाप एवं सत्संग आयोजित किया जाता है, जिसमें सभी श्रद्धालु सपरिवार सहभागी होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महापर्व का समापन भक्तिमय वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक चेतना, आत्मिक ऊर्जा एवं गुरु परंपरा के प्रति समर्पण का अनुपम पर्व बताते हुए ऐसे आयोजनों की निरंतरता की कामना की।

