


नर्मदापुरम / नर्मदापुरम जिले के ग्राम तवानगर के प्राकृतिक सौंदर्य और घने जंगलों के बीच स्थित श्री दादाजी दरबार आश्रम एक दिव्य आध्यात्मिक धाम के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आश्रम में पिछले 25 वर्षों से निरंतर चली आ रही परंपरा के तहत इस वर्ष भी विधि-विधान से कन्या पूजन एवं विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन में तवानगर सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज़ से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर महाप्रसाद ग्रहण किया और गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सर्व धर्म सद्भावना समिति के संरक्षक बशारत खान ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आयोजित होने वाला यह धार्मिक आयोजन विगत 25 वर्षों से निरंतर जारी है और आज क्षेत्र की पहचान बन चुका है। उन्होंने बताया कि तवानगर के जंगलों की हरियाली के बीच स्थित यह दिव्य आश्रम केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का एक पवित्र केंद्र है। यहां नैष्ठिक ब्रह्मऋषि श्री श्री ज्ञानानंद जी महाराज, श्री पंच अग्नि अखाड़ा तपस्या में लीन रहते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु उनके दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं। गुरुजी भक्तों से आत्मीय संवाद कर उन्हें सत्य, सनातन संस्कृति, मानव सेवा और जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान श्री श्री 1011 ब्रह्मलीन आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि प्रकाशानंद जी महाराज की पावन स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। वहीं नैष्ठिक ब्रह्मऋषि श्री श्री ज्ञानानंद महाराज, श्री पंच अग्नि अखाड़ा के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद में संपूर्ण धार्मिक आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। अपने आशीर्वचन में गुरुजी ने कहा कि गुरु का सान्निध्य ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान, असत्य से सत्य और निराशा से आशा की ओर ले जाता है।
पूरे आयोजन के दौरान “जय श्री दादाजी धूनीवाले प्रसन्न” के जयघोष से आश्रम परिसर गुंजायमान रहा। कन्या पूजन के उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में ग्रामवासियों, युवाओं एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ योगदान दिया। सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम पूरे आयोजन में देखने को मिला।
श्री दादाजी दरबार आश्रम आज केवल तवानगर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान बन चुका है। जंगलों की शांत वादियों में स्थित यह आश्रम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, गुरु कृपा और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है। 25 वर्षों से अखंड रूप से चली आ रही यह परंपरा गुरु भक्ति, सनातन संस्कृति, सेवा, सद्भाव और मानवता का जीवंत उदाहरण है। गुरु पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सच्चे संतों का सान्निध्य और गुरु कृपा ही समाज को संस्कार, सद्भाव और सही दिशा प्रदान करती है।

