
नर्मदापुरम / गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन आध्यात्मिक और शैक्षणिक गुरुओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित है। हिंदू धर्म में इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन महान ऋषि वेद व्यास का जन्म हुआ था।
क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?
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महर्षि वेद व्यास जयंती: सनातन धर्म में वेदों का विभाजन करने और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले महर्षि वेद व्यास को आदिगुरु माना जाता है। उनके जन्मदिवस को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
बौद्ध धर्म में महत्व: बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अनुसार, इस दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था।
जैन धर्म: जैन परंपरा में इस दिन को भगवान महावीर द्वारा अपने पहले शिष्य गौतम स्वामी बनाने की स्मृति के रूप में भी मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?
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गुरु पूजन: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और अपने गुरुओं की पूजा करें। यदि आपके गुरु साक्षात मौजूद हैं, तो उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
आध्यात्मिक साधना: यदि आपके गुरु भौतिक रूप से साथ नहीं हैं, तो आप उनका ध्यान और स्मरण कर सकते हैं। इस दिन ध्यान और साधना करने का विशेष महत्व है।
दान-पुण्य: जरूरतमंदों को दान करना, संतों की सेवा करना और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है।(संकलन – प्रीति चौहान)

