
नर्मदापुरम / राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं शिक्षण संस्थान (SIEMAT) भोपाल के निर्देशानुसार तथा जिला परियोजना समन्वयक एवं डाइट प्राचार्य डॉ. राजेश जायसवाल के निर्देशन में पचमढ़ी में 20 से 24 जुलाई तक आयोजित पांच दिवसीय “अकादमिक मॉनिटरिंग आधारित क्षमता वर्धन प्रशिक्षण” का समापन हुआ। प्रशिक्षण में जिले के सभी 74 जन शिक्षकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, कक्षा-प्रबंधन को प्रभावी बनाना तथा विद्यालयों में अकादमिक मॉनिटरिंग को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रभावी पाठ योजना, बहु-स्तरीय शिक्षण (डिफरेंशिएटेड इंस्ट्रक्शन), आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियां, डेटा आधारित मॉनिटरिंग तथा पाठ्य-उत्तर फीडबैक से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
मास्टर ट्रेनर राजकुमार बघेल ने सक्रिय शिक्षण पद्धतियों,अकादमिक मॉनिटरिंग, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधारएवं छात्र-केंद्रित गतिविधियों पर प्रायोगिक सत्र संचालित किए। मास्टर ट्रेनर शालीन दास ने स्थानीय संदर्भों के अनुरूप उदाहरणों के माध्यम से व्यवहारिक शिक्षण तकनीकों की जानकारी दी। वहीं मास्टर ट्रेनर आशीष राकेश ने पॉक्सो एक्ट एवं RPwD Act के प्रावधानों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
अमित गौर एवं जितेंद्र बैरागी ने असाइनमेंट डिजाइन और फॉर्मेटिव असेसमेंट पर कार्यशालाएं आयोजित कीं। डाइट के संजय भट्ट ने रिकॉर्ड-कीपिंग और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं पर विशेष जानकारी दी। बैतूल जिले से आए मास्टर ट्रेनर दुर्गादास धोटे तथा प्रदीप गीते ने एफएलएन (FLN) गतिविधियों और दीक्षा एप के प्रभावी उपयोग पर प्रशिक्षण दिया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश जायसवाल ने कहा कि यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप शैक्षिक गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित जन शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में प्राप्त ज्ञान और नवाचारों को लागू कर विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सकारात्मक सुधार लाएंगे।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली और प्रशिक्षकों के व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता जताई। अधिकारियों ने बताया कि आगामी महीनों में जिले भर में मॉनिटरिंग एवं सपोर्ट विजिट्स आयोजित की जाएंगी, ताकि प्रशिक्षण के प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके और उसे दीर्घकालिक रूप से लागू किया जा सके।

