
नर्मदापुरम / प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार नोटिया के न्यायालय ने नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम में दर्ज वित्तीय गबन व धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हरीश गोस्वामी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अनुसंधान जारी रहने और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास (भोपाल) द्वारा जारी ऑडिट जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि निकाय स्तर पर वसूली पत्रकों के संधारण में भारी लापरवाही बरती गई, जिसके लिए तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) और लेखापालों को जिम्मेदार ठहराया गया है। कोर्ट की कार्रवाई एवं अग्रिम जमानत याचिका निरस्त (प्रकरण क्रमांक: 255/2026)
नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के उपाध्यक्ष अभय वर्मा द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत पर पुलिस थाना कोतवाली में दिनांक 10.07.2026 को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 408 एवं 420 (अमानत में खयानत व धोखाधड़ी) के तहत अपराध क्रमांक 652/2026 दर्ज किया गया था।
आरोपी हरीश गोस्वामी (उम्र 46 वर्ष, निवासी मकान नं. 305, कामायनी कॉम्प्लेक्स, नर्मदापुरम)।
आवेदक पक्ष के तर्क…
आरोपी की ओर से अधिवक्ता आर.एस. यादव ने पक्ष रखा। आरोपी के बहनोई प्रवीण कुमार शर्मा के शपथ पत्र के साथ अग्रिम जमानत (BNSS धारा 482) मांगी गई। आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि जांच से पूर्व ‘अल्विस सॉफ्टवेयर’ को डिलीट कर दिया गया और रसीदों का सही परीक्षण नहीं किया गया, इसलिए जांच समिति संदिग्ध है।अभियोजन (राज्य) पक्ष का विरोध अपर लोक अभियोजक मनोज कुमार चौरे ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर धाराएं हैं, जिनमें 7 वर्ष तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। मामला नामजद है और पुलिस जांच जारी है।
अदालत का फैसला….
न्यायाधीश ने माना कि अनुसंधान जारी रहते अग्रिम जमानत देना उचित नहीं है। अदालत ने जमानत निरस्त करते हुए पुलिस को सर्वोच्च न्यायालय के ‘अर्नेश कुमार विरुद्ध बिहार राज्य (2014)’ के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। वित्तीय जांच तत्कालीन CMO व लेखापालों पर गिरी गाज मामले से जुड़े संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास (भोपाल) के आधिकारिक दस्तावेज (वर्ष 2019-20 हेतु ऑडिट प्रतिवेदन) से यह बात सामने आई है कि नगर पालिका में वित्तीय अभिलेखों के संधारण में गंभीर लापरवाही हुई।
त्रुटिपूर्ण वसूली पत्रक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा दी गई ऑडिट टिप्पणी निकाय द्वारा उपलब्ध कराए गए त्रुटिपूर्ण वसूली पत्रकों पर आधारित थी।
प्रशासनिक लापरवाही सीए रिपोर्ट को संचालनालय भेजने से पूर्व तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) द्वारा इन त्रुटिपूर्ण पत्रकों में सुधार कराया जाना चाहिए था। निकाय स्तर पर त्रुटिपूर्ण पत्रकों का संधारण शासकीय कार्यों के प्रति घोर लापरवाही व उदासीनता दर्शाता है। जिम्मेदार ठहराए गए अधिकारी जांच रिपोर्ट में इस लापरवाही के लिए तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) तथा तत्कालीन पदस्थ लेखापाल/प्रभारी लेखापाल को प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी माना गया है।

