
नर्मदापुरम / सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संकटमोचन श्री हनुमान जी कीर्तन परिवार, नर्मदापुरम पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से प्रत्येक शनिवार को नियमित रूप से श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन कर रहा है। बिना किसी शुल्क के होने वाला यह आयोजन आज शहर में धार्मिक जागरूकता का एक प्रेरणादायी अभियान बन चुका है।
इसी क्रम में हाल ही में एकता चौक स्थित आदर्श सोनी के निवास पर संकटमोचन श्री हनुमान जी कीर्तन परिवार द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति भाव से श्री हनुमान चालीसा पाठ, भजन-कीर्तन एवं महाआरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान श्रीराम एवं संकटमोचन श्रीहनुमान जी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कीर्तन परिवार के सौरभ सराठे ने बताया कि यह धार्मिक सेवा पूरी तरह निःशुल्क है। यदि कोई श्रद्धालु अपने घर, प्रतिष्ठान या परिवार में श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं भजन-कीर्तन कराना चाहता है, तो कीर्तन परिवार पूरे श्रद्धाभाव से वहां पहुंचकर कार्यक्रम संपन्न कराता है। आयोजन में केवल श्रद्धालुओं द्वारा अपनी इच्छा से प्रसाद वितरण किया जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक शनिवार शाम 7 बजे से रात्रि 8 से 9 बजे तक कार्यक्रम आयोजित होता है। इसमें श्री हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, भजन-कीर्तन, महाआरती तथा प्रसाद वितरण किया जाता है। कीर्तन मंडली में हारमोनियम, ढोलक एवं अन्य वाद्ययंत्रों के साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों के अलावा नन्हे-मुन्ने बच्चे भी पूरे उत्साह से भाग लेते हैं, जिससे नई पीढ़ी में भी धार्मिक संस्कार विकसित हो रहे हैं।
सौरभ सराठे ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार, हिंदुत्व की भावना को सशक्त करना, युवाओं एवं बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना तथा समाज में धार्मिक आस्था और पारिवारिक एकता को मजबूत करना है। उनका कहना है कि जिस घर में श्रद्धापूर्वक श्री हनुमान चालीसा का पाठ होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बना रहता है तथा भगवान श्रीहनुमान की कृपा परिवार पर बनी रहती है।
संकटमोचन श्री हनुमान जी कीर्तन परिवार ने नगर के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस धार्मिक अभियान से जुड़ें और अपने परिवारों में श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन कर समाज में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाने में सहयोग दें।

