
नर्मदापुरम / शहर के हाउसिंग बोर्ड औद्योगिक क्षेत्र में वन विभाग ने औचक निरीक्षण के दौरान एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रशिक्षु आईएफएस और एसडीओ शोभित जोशी तथा महेंद्र गौर के मार्गदर्शन में लगभग तीन घंटे तक चली इस मैराथन जांच के दौरान ‘श्रीनिवास सॉमिल’ के नजदीक भारी मात्रा में अवैध सतकटा लकड़ी का जखीरा पकड़ा गया।
सड़क किनारे मिला लकड़ी का अंबार जांच के दौरान टीम ने पाया कि आरा मशीन के समीप सड़क के किनारे करीब 300 फीट तक लकड़ी के लट्ठे और जखीरा फैला हुआ था। कुल 37 घनमीटर लकड़ी यहां डंप की गई थी। इसमें से 26 घनमीटर लकड़ी पर सॉमिल संचालक राजू राव द्वारा किसानों की लकड़ी होने का दावा किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब एक लाख रुपये आंकी गई है। हालांकि, मौके पर संचालक इस दावे के समर्थन में कोई भी वैध दस्तावेज या अनुमति पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहे। इसके अतिरिक्त, मौके पर 11 घनमीटर लकड़ी पूरी तरह लावारिस हालत में पाई गई, जिसका कोई भी दावेदार सामने नहीं आया। स्टॉक रजिस्टर में खामियां और कानूनी कार्रवाई
वन विभाग की जांच टीम ने जब ‘श्रीनिवास सॉमिल’ के स्टॉक रजिस्टर की पड़ताल की, तो उसमें भी कई गंभीर अनियमितताएं और कमियां पाई गईं। विभाग ने तुरंत सभी अवैध लकड़ी को अपने कब्जे में लेते हुए पंचनामा तैयार किया। इस मामले में काष्ठ चिरान अधिनियम 1984 के प्रावधानों के तहत आरा मशीन संचालक राजू राव के विरुद्ध औपचारिक रूप से प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दूसरी आरा मशीन का स्टॉक मिला दुरुस्त इसी अभियान के तहत वन विभाग की टीम ने क्षेत्र की दूसरी आरा मशीन यानी ‘होंडा सॉमिल’ की भी जांच की, जहां स्टॉक का मिलान सही पाया गया और कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
अधिकारियों की चेतावनी….
प्रशिक्षु आईएफएस शोभित जोशी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियमित रूटीन जांच का हिस्सा थी। उन्होंने दो टूक कहा कि जिले के भीतर लकड़ी के अवैध भंडारण, कटाई और परिवहन पर वन विभाग की पैनी नजर है। नियमों का उल्लंघन करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय काष्ठ कारखानों और आरा मशीन संचालकों में हड़कंप मच गया है।

