
नर्मदापुरम / मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनभोगियों (सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों) के व्यापक हितों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकारों द्वारा एक अत्यंत संवेदनशील, युगांतकारी और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। राज्यसभा सांसद माया नारोलिया के सतत और प्रखर प्रयासों के फलस्वरूप, दोनों राज्यों के पेंशनरों को सेवानिवृत्ति के उपरांत देय महंगाई राहत (DR) की प्राप्ति में बाधक बनी दो दशक पुरानी वैधानिक विसंगति को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि ‘भारत पेंशनर्स समाज’ (जिला शाखा-नर्मदापुरम) एवं सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारी पेंशनर महासंघ द्वारा सांसद नारोलिया को एक विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया था। इस ज्ञापन के माध्यम से राज्य पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49(6) के अंतर्गत दोनों राज्यों के मध्य पारस्परिक सहमति की अनिवार्यता के कारण महंगाई राहत की फाइलों में होने वाले अत्यधिक प्रशासनिक विलंब और उससे उत्पन्न मानसिक व आर्थिक संताप से अवगत कराया गया था।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों की इस न्यायोचित मांग को सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ शीर्ष नेतृत्व के समक्ष उठाया। उन्होंने देश के यशस्वी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में दिनांक 20.07.2024 को प्रत्यक्ष भेंट कर पत्र क्रमांक 53 के माध्यम से इस गंभीर विसंगति की ओर उनका ध्यान आकृष्ठ किया तथा इस वैधानिक बाध्यता को विलोपित करने हेतु ठोस नीतिगत हस्तक्षेप का आग्रह किया था। इसके साथ ही, श्रीमती नारोलिया ने दिनांक 08.05.2025 को मध्य प्रदेश के जनप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष भी पत्र क्रमांक 402 के माध्यम से इस विषय को अत्यंत मुखरता से प्रस्तुत कर प्रशासनिक सरलीकरण का अनुरोध किया था।
लगभग दो वर्षों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं सतत कार्यवाहियों का दौर जारी रहा। केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे का संज्ञान लेते हुए, इस अवधि में इसका विस्तृत विश्लेषण और गहन नीतिगत मंथन किया गया। शीर्ष नेतृत्व के कुशल मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों ने प्रशासनिक सुगमता तथा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवनयापन को सर्वोपरि मानते हुए इस जटिल समस्या का सर्वमान्य व स्थायी निष्कर्ष निकाल लिया।
इसी अनुक्रम में, मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश क्रमांक ई-1077487/2026/नियम/04/वित्त जारी कर निम्नलिखित कल्याणकारी निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं जिसके फलस्वरूप, अब दोनों राज्यों के पेंशनरों को देय महंगाई राहत (DR) घोषित करने हेतु एक-दूसरे राज्य की पारस्परिक पूर्व-सहमति प्राप्त करने की जटिल अनिवार्यता को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।
पेंशन राहत में वृद्धि की प्रक्रिया को गति देने के लिए अब किसी लंबे वैधानिक संशोधन के स्थान पर दोनों राज्य सरकारें स्वतंत्र रूप से कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी कर सकेंगी।
आदेश के क्रियान्वयन के फलस्वरूप पड़ने वाले वित्तीय भार के संबंध में मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ शासन प्रशासनिक औपचारिकता के तहत परस्पर केवल सूचना हेतु पत्र प्रेषित करेंगे, जिससे निर्णय की त्वरित गति प्रभावित नहीं होगी।
कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत की दरों से अधिक दर घोषित नहीं करेगा, जिससे वित्तीय अनुशासन और एकरूपता सुनिश्चित रहे।
“हमारे वरिष्ठ पेंशनभोगी परिवारों को उनके जीवन के उत्तरार्ध में आर्थिक सुरक्षा और मानसिक संतोष प्रदान करने वाले इस ऐतिहासिक निर्णय हेतु मैं देश के गृह मंत्री अमित शाह एवं प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का कोटि-कोटि आभार व्यक्त करती हूँ। हमारी डबल इंजन सरकार समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति और राष्ट्र निर्माण में अपना जीवन समर्पित करने वाले हमारे वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”-
श्रीमती माया नारोलिया, सांसद (राज्यसभा)।

