
नर्मदापुरम / जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर न्यायालय परिसर पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है। 15 जुलाई 2026 को जिला न्यायालय में मतदान होगा।
अध्यक्ष पद सहित विभिन्न पदों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं के बीच गहन मंथन और बैठकों का दौर जारी है। न्यायालय परिसर में इन दिनों कानूनी बहसों के साथ-साथ चुनावी समीकरणों और संभावित परिणामों पर भी चर्चा हो रही है। अध्यक्ष पद के लिए इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं, जिससे चुनाव बेहद दिलचस्प और प्रतिस्पर्धात्मक होता दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे प्रत्याशी लगातार वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं से व्यक्तिगत संपर्क कर अपना पक्ष रख रहे हैं। बार रूम, न्यायालय परिसर और अधिवक्ताओं के चेंबरों में पूरे दिन चुनावी चर्चाएं सुनाई दे रही हैं। समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।
हालांकि चुनावी समीकरणों पर नजर रखने वाले अधिवक्ताओं का मानना है कि भले ही मुकाबला त्रिकोणीय दिखाई दे रहा हो, लेकिन वास्तविकता कुछ और है, जो स्थानीय अधिवक्ताओं मनोज जराठे, अजय प्रकाश श्रीवास्तव और सुरेंद्र राजपूत के बीच सिमटता नजर आ रहा है। सभी प्रत्याशी लंबे समय से अधिवक्ता समुदाय में सक्रिय हैं और अपने अनुभव, कार्यशैली तथा अधिवक्ताओं के हितों के लिए किए गए कार्यों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहे हैं।
अनेक अधिवक्ताओं का कहना है कि जिला अधिवक्ता संघ का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में होना चाहिए, जो न्यायालय से जुड़े विकास कार्यों को गति दे सकता है। बार कोंसिल की स्वच्छ छवि बनाऐ रखे, अधिवक्ताओं के आपसी विरोध मनमुटाव में सामंजस्य स्थापित करें।
अधिवक्ताओं के हितों पर केंद्रित हैं चुनावी वादे….
चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी अधिवक्ताओं के लिए बेहतर बार लाइब्रेरी, आधुनिक सुविधाएं, युवा अधिवक्ताओं के प्रशिक्षण, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के सम्मान, न्यायालय परिसर में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रत्येक प्रत्याशी अपने अनुभव और कार्ययोजना के आधार पर मतदाताओं का विश्वास जीतने का प्रयास कर रहा है।
सम्मानजनक और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव होने की उम्मीद है….
जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव हमेशा गरिमापूर्ण परंपरा के लिए जाना जाता रहा है। इस बार भी अधिवक्ताओं को उम्मीद है कि चुनाव पूरी शालीनता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप संपन्न होगा तथा परिणाम चाहे जो भी हो, अधिवक्ता समुदाय की एकजुटता बनी रहेगी।
अब सभी की निगाहें मतदान दिवस और मतगणना पर टिकी हैं। चुनावी माहौल को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इस बार अध्यक्ष पद की लड़ाई कड़ी होने वाली है। राजनीतिक दल समर्पित कौन प्रत्याशी अधिवक्ताओं का अधिक विश्वास जीतकर जिला अधिवक्ता संघ की कमान संभालेगा, इसका फैसला मतपेटी खुलने के बाद ही होगा।

