नर्मदापुरम / सहायक संचालक मत्स्य उद्योग कार्यालय में मछुआ दिवस मनाया गया। जिसमें जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं मत्स्य उद्योग से जुड़े हुए सभी कार्यकर्ता समिति अध्यक्ष एवं सामाजिक संगठनों के अध्यक्ष एवं विभागीय कर्मचारी अधिकार उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए सांसद प्रतिनिधि हरीश केवट ने मछुआरा पुरुष और महिला, अतिथिगण एवं मत्स्य विभाग के सभी कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि आज हम मछुआ दिवस मना रहे हैं। यह दिन उन वीर पुरुषों और महिलाओं को समर्पित है, जो सूरज निकलने से पहले नदियों, तालाबों और बांधों पर उतरते हैं। वे अपनी मेहनत से हमारे थाल में स्वादिष्ट मछली लाते हैं, अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं और देश की नीली क्रांति में अपना योगदान देते हैं। आज का यह अवसर सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है – मछुआरों का जीवन बेहतर बनाने का, मत्स्य पालन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का।
कल्पना कीजिए… सुबह का सूरज, नर्म हवा और एक नाव जो पानी को चीरती हुई आगे बढ़ रही है। नाव पर हमारे मछुआ भाई जाल फेंक रहे हैं। यह दृश्य सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की कहानी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक यही सोचा था जब उन्होंने नील क्रांति (Blue Revolution) को नई दिशा दी।
नील क्रांति योजना यानी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने पूरे देश में मत्स्य क्षेत्र को क्रांति की तरह बदल दिया। दस साल पहले जहां मछली उत्पादन 96 लाख टन के आसपास था, आज वह लगभग दोगुना होकर 198 लाख टन पहुंच गया है। निर्यात बढ़ा, रोजगार बढ़ा और मछुआरों की आय में इजाफा हुआ। मोदी जी का सपना है – समुद्र से लेकर अंतर्देशीय जल स्रोतों तक, हर बूंद पानी को समृद्धि का स्रोत बनाना। यह योजना आधुनिक हैचरी, कोल्ड चेन, बीमा, प्रशिक्षण और सब्सिडी के जरिए मछुआरों को सशक्त बना रही है।
अपने मध्य प्रदेश की बात करें। मध्य प्रदेश देश का दिल है। यहां नदियां, बांध और तालाब मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ठान लिया है कि मध्य प्रदेश मत्स्य उत्पादन में भी नंबर-1 बनेगा।
डॉ. मोहन यादव, मत्स्य मंत्री नारायण पवार के नेतृत्व में मत्स्य विभाग ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना मछुआरों के कल्याण के लिए शुरू की गई है। हर जिले में कम से कम एक आधुनिक हैचरी स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हम बंगाल या अन्य राज्यों पर मछली बीज के लिए निर्भर न रहें। इंदिरा सागर जैसे बड़े बांधों में केज कल्चर की 3360 यूनिट्स पर काम हो रहा है। 453 स्मार्ट फिश पार्लर बनाए जा रहे हैं। मछली पालन को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिससे निवेश और विकास को नई गति मिलेगी।
हाल ही में कुवैत के साथ 7430 करोड़ रुपये का बड़ा MoU हुआ है। यह निवेश आधुनिक एक्वाकल्चर, वैल्यू एडिशन और निर्यात को बढ़ावा देगा। 35,000 से ज्यादा रोजगार पैदा होंगे। CM मोहन यादव कहते हैं – “मछुआ समुदाय को मुख्यधारा में लाना हमारा संकल्प है।” मछली बाजार की व्यवस्था, और फिस पार्लर जैसी आधुनिक सुविधाएं – ये सभी कदम मछुआरों के हित में हैं। नगर इटारसी में भी फिस पार्लर का निर्माण किया जा चुका हे शीघ्र ही हमारे नर्मदापुरम में भी तीन फिस पार्लर प्रस्तावित हें। जब केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी की नील क्रांति और राज्य में CM मोहन यादव का विजन साथ मिलता है, तो परिणाम अवश्यंभावी हैं। मध्य प्रदेश में मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य 3.42 लाख मीट्रिक टन से भी आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक तालाबों का विकास, रोडमैप 2024-25, हर जिले में हैचरी – ये सब मिलकर मछुआरों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
मैं आपसे पूछता हूं – क्या हम तैयार हैं? तैयार हैं उस भविष्य के लिए जहां हर मछुआ परिवार का घर पक्का हो, बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो, आय दोगुनी हो और मछली “मध्य प्रदेश ब्रांड” के नाम से दुनिया में प्रसिद्ध हो? हां, हम तैयार हैं!
युवाओं से अपील – मत्स्य पालन अब सिर्फ पारंपरिक पेशा नहीं, बल्कि स्टार्टअप और उद्यमिता का क्षेत्र है। आधुनिक तकनीक, मोबाइल ऐप्स, प्रोसेसिंग यूनिट्स – सब आपके लिए मौजूद है। महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर मछली उत्पादन और बिक्री में आगे आएं।
मछुआ दिवस का यह संदेश है – जल है तो जीवन है, मछली है तो समृद्धि है। आइए, हम सब मिलकर प्रधानमंत्री जी की नील क्रांति को मध्य प्रदेश में और मजबूत करें। CM मोहन यादव जी के नेतृत्व में हर बूंद पानी को सोना बनाएं।
अंत में, उन सभी मछुआ भाइयो-महिला को नमन, जो सुबह-शाम पानी से जूझते हैं। सरकार आपके साथ है। विकास आपके नाम है। मछुआ समुदाय के विकास के लिए हमारी सरकार द्रणसंकल्पित है।
अतिथि गण….
हरीश कुमार केवट,
सांसद प्रतिनिधि नर्मदापुरम।
प्रकाश केवट, माझी समाज प्रदेश अध्यक्ष।
उमेश पटेल, माझी समाज उपाध्यक्ष।
बद्री केवट, विनोद कहार, राजेश रेकवार, केलाश मेवारी एवं मछुआरा समुदाय के वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।

