
नर्मदापुरम / वर्षा ऋतु के दौरान अनेक स्थानों पर कीचड़ एवं जलभराव की स्थिति निर्मित हो जाने के कारण मवेशी सूखे एवं सुरक्षित स्थान की तलाश में प्रायः सड़कों पर आकर बैठ जाते हैं। रात्रिकाल में विशेष रूप से काले रंग के मवेशी वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी दुर्घटनाओं में न केवल मवेशियों, बल्कि वाहन चालकों एवं अन्य यात्रियों को भी गंभीर क्षति पहुँच सकती है।
पुलिस अधीक्षक साईंकृष्णा एस. थोटा के मार्गदर्शन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन के निर्देशन में सड़क सुरक्षा एवं दुर्घटना रोकथाम के उद्देश्य से उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री संतोष मिश्रा एवं उनकी टीम द्वारा लायंस क्लब, होशंगाबाद-नर्मदापुरम के सहयोग से एक विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है।
अभियान के अंतर्गत सड़कों पर बैठने वाले मवेशियों के गले में रेडियम पट्टियाँ एवं उनके सींगों पर रेडियम रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं, जिससे रात्रि के समय उनकी दृश्यता बढ़ सके तथा वाहन चालक उन्हें दूर से देखकर आवश्यक सावधानी बरत सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ मवेशियों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इसी क्रम में दिनांक 09 जुलाई 2026 को सायं 6:00 बजे होटल आनंद श्री, नर्मदापुरम में लायंस क्लब के पदाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक एवं चर्चा के उपरांत इस जनहितकारी अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के प्रथम चरण में चक्कर रोड से फोरलेन मार्ग तक लगभग 50 मवेशियों के गले एवं सींगों पर रेडियम लगाए गए।
कार्यक्रम में लायंस क्लब के वरिष्ठ सदस्य लायंस डी.एस. दांगी, एडिशनल कैबिनेट सेक्रेटरी लायंस डॉ. अतुल सेठा, क्लब अध्यक्ष हरि सिंह चौहान, सचिव पवन शुक्ला, योगाचार्य राकेश चौहान, लायंस सुभाष बरेले, लायंस ललित सोनी, लायंस देवेंद्र वर्मा, लायंस रत्नेश दीवान, चंद्रशेखर शर्मा एवं लायंस बावरिया सहित उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) संतोष मिश्रा, यातायात सूबेदार विनय अडलक तथा यातायात पुलिस के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग प्रदान किया।
नर्मदापुरम पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वर्षा ऋतु के दौरान रात्रि में वाहन चलाते समय विशेष सतर्कता बरतें, निर्धारित गति सीमा का पालन करें तथा सड़क पर बैठे मवेशियों एवं अन्य अवरोधों के प्रति सजग रहें। सड़क सुरक्षा के प्रति नागरिकों की जागरूकता एवं सहभागिता से ही दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

