
सिवनी मालवा / सिवनी मालवा एवं बनापूरा वन परिक्षेत्र के जंगलों में कीमती सागौन के पेड़ों की कटाई के मामले सामने आने से वन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जंगल के भीतर कटे हुए पेड़ों के ठूंठ दिखाई देने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की नियमित निगरानी के अभाव में जंगलों में पेड़ों की कटाई की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में वन क्षेत्र के कच्चे रास्तों और सड़क किनारे स्थित जंगलों में रात के समय लकड़ी तस्कर सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे समय में वन विभाग के कर्मचारियों को नियमित गश्त और सघन निगरानी करनी चाहिए, ताकि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इससे पहले भी इसी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध कटाई करने वालों के हौसले बुलंद हैं। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो धीरे-धीरे जंगलों का हरित स्वरूप खत्म होता जाएगा और पर्यावरण पर भी इसका गंभीर असर पड़ेगा।
वन विशेषज्ञों के अनुसार एक सागौन के पेड़ को तैयार होने में कई दशक लग जाते हैं, जबकि उसे काटने में कुछ ही घंटे लगते हैं। लगातार हो रही कटाई से वन संपदा, जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने, जंगलों में रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के बहुमूल्य जंगलों को सुरक्षित रखा जा सके।

