नर्मदापुरम / ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को चम्पक द्वादशी कहा जाता है। इसे राघव द्वादशी या रामलक्ष्मण द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण (गोविंद विट्ठलनाथ जी) और प्रभु श्री राम-लक्ष्मण की पूजा की जाती है।
चम्पक द्वादशी 2026 तिथि व शुभ मुहूर्त
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• द्वादशी तिथि प्रारंभ: 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे से
• द्वादशी तिथि समाप्त: 26 जून 2026 को रात 10:22 बजे तक
• उदयातिथि के अनुसार व्रत व पूजा का दिन: 26 जून 2026, शुक्रवार
धार्मिक महत्व
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• अटके काम पूरे होना: मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से लंबे समय से रुके हुए और बिगड़े काम तुरंत पूरे हो जाते हैं।
• मोक्ष की प्राप्ति: शास्त्रों के अनुसार, चम्पक द्वादशी पर चम्पा के फूलों से भगवान कृष्ण की आराधना करने वाले भक्त को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और विष्णु लोक में स्थान प्राप्त होता है।
• चम्पा के फूलों का विशेष संबंध: चम्पा के पुष्प भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में इन सुगंधित पुष्पों से प्रभु का श्रृंगार करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं।
संपूर्ण पूजा विधि
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• प्रातः काल स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (यदि संभव हो तो पीले रंग के) धारण करें।
• पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान कृष्ण या श्री राम-लक्ष्मण की मूर्ति अथवा तस्वीर स्थापित करें।
• तिलक और दीपक: भगवान के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। प्रतिमाओं पर चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं।
• विशेष पुष्प अर्पण: भगवान को चम्पा के फूलों की माला पहनाएं या चम्पा के खुले फूल अर्पित करें। (यदि चम्पा के फूल न मिलें, तो कोई भी पीले या सफेद फूल चढ़ा सकते हैं)।
• भोग या नैवेद्य: भगवान को पंचामृत, फल, और मिश्री-माखन का भोग लगाएं।
• मंत्र का जाप: पूजा के दौरान भगवान कृष्ण के इस विशेष मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें:
“वंदे नवघनश्यामम् पीत कौशेयवाससम्। सानंदम् सुंदरम् शुद्धम् श्रीकृष्णम् प्रकृतेः परम्॥”
• आरती और दान: पूजा के अंत में आरती करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या ठंडे जल/शरबत का दान करें। (संकलन – प्रीति चौहान)

