
नर्मदापुरम् / थाना कोतवाली जिला नर्मदापुरम् के अपराध कमांक 953/2026 अंतर्गत धारा 80 (2) 108 एवं 85 बीएनएस तथा धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम शासन विरुद्ध पुरुषोत्तम मलैया एवं अन्य 4 में सत्र न्यायाधीश नर्मदापुरम् के न्यायालय में आज दिनांक 23-जून-2026 को निर्णय पारित किया गया। जिसमें आरोपीं पुरूषोत्तम मलैया, मधुबाई एवं नेमीदास मलैया प्रत्येक को धारा 108 बीएनएस के अंतर्गत पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5000 के अर्थदंड एवं धारा 85 बीएनएस के अंतर्गत एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये के अर्थदंड से दडित किया गया। अर्थदंड की राशि अदायगी में व्यतिक्रम पर कमशः छः माह एवं एक माह के सश्रम कारावास भुगताए जाने के आदेश दिए गए। शेष आरोपीं हेमंत मलैया को आरोप प्रमाणित न होने के कारण दोषमुक्त किया गया। प्रकरण अभियोजन की तरफ से पैरवी शैलेन्द्र कुमार गौर लोक अभियोजक शासकीय अभिभाषक द्वारा की गई ।
लोक अभियोजक श्री गौर द्वारा बताया गया कि अभियोजन प्रकरण के अनुसार घटना दिनांक 27.11.25 को शाम करीब 07.30 बजे पूजा पत्नी पुरूषोत्तम मलैया को हेमंत मलैया द्वारा अस्पताल लाया गया। सूचनाकर्ता के द्वारा बताया कि मरीज ने घर में फांसी लगाई थी। परीक्षण करने पर उसे मृत घोषित किया गया। उक्त आशय की सूचना जिला अस्पताल नर्मदापुरम् के डॉ. मैत्री चौरे द्वारा पुलिस थाना कोतवाली नर्मदापुरम् को प्रेषित की गई। अस्पताल से प्राप्त जानकारी एवं मृतिका के ससुर नेमीदास की सूचना के आधार पर मर्ग इंटीमेशन रिपोर्ट लेखबद्ध की गई। धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत अप्राकृतिक मृत्यु का पंजीयन किया गया। मर्ग जांच के दौरान साक्षीगण के समक्ष लाश का नक्शा पंचायतनामा तैयार किया गया। मृतिका की मृत्यु फांसी लगने के परिणामस्वरूप होना अभिमत किया गया। शव परीक्षण कराया गया जिसमें फांसी लगने के कारण श्वास अवरूद्ध होने से मृत्यु घटित होना पाया गया। साक्षीगण द्वारा अपने कथन में बताया कि विवाह पश्चात अभियुक्तगण मृतिका से दहेज में कार मंगवाने के लिये ताने मारते थे और उसे शरीरिक और मानसिक रूप से प्रताडित करते थे मृतिका द्वारा यह कहने पर कि उसे पिता की हैसियत नहीं है। अभियुक्तगण उसके साथ मारपीट करते थे घर में खाना बनाने सोने उठने बैठने इत्यादि छोटी छोटी बातों को लेकर प्रताडित करते थे। कभी मृतिका जवाब दे देती थी तो सभी लोग उसके साथ मारपीट करते थे । ससुराल वाले मृतिका को खाने पीने में भी रोक लगाते थे। दिनांक 25.11.25. को मृतिका ने अपने भाई अमन राजौरिया को फोन करके बताया था कि उसके सास ससुर और देवर ने खाना बनाने की बात पर से मारपीट की थी, जब मृतिका ने पति को यह बात बताई तो पति ने कहा कि जैसे माता पिता रखे वैसे ही रहना पडेगा। इसके बाद मृतिका का मायके वालो से संपर्क नहीं हुआ और दिनांक 27.11.25 को शाम 7 बजे मृतिका ने अपने घर के दूसरे कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। साक्षीगण के उक्त कथन के आधार अभियुक्तणों के विरूद्ध मामला पंजीबद्ध किया गया ।
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से 15 साक्षियों के कथन लेखबद्ध कराए गए, जिन पर विश्वास करते हुए अभियुक्त को सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।

