
नर्मदापुरम / राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अधीनस्थ श्यामला हिल्स भोपाल में संचालित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में दिनांक 16/6/26 से 20/6/26 तक पीएम श्री विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक गणित विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों/कुशल प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित हुआ। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए अपर संचालक डॉ मनीष वर्मा ने कहा कि जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिसमें गणित का उपयोग नहीं होता हो। एक चित्रकार भी चित्र बनाने में विभिन्न आकृतियों /ज्यामिति एवं लम्बाई, चौड़ाई/ऊंचाई इत्यादि का आनुपातिक रेखांकन करता है। रोजमर्रा में गृहणियां खाना पकाने में विभिन्न खाद्य सामग्रियों, मसालों इत्यादि का आवश्यक मात्रा में इस्तेमाल करती हैं। समय का मापन तो गणित के बिना संभव ही नहीं है। चिकित्सक भी अपने मरीज को निर्धारित अंतराल पर निश्चित मात्रा में दवाईयों के सेवन का परामर्श देते हैं। यदि गणित न हो तो अर्थशास्त्र तो अनाथ जैसा हो जाएगा। किसी भी भवन/वास्तु के निर्माण में भी गणित के बिना ड्राइंग डिजाइन, प्रांकलन बनाना संभव नहीं है। अतः जिस विद्यार्थी का गणित अच्छा हो तो वह अन्य क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करता है, इसीलिए प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर गणित विषय का शिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिसे हमें बड़ी जिम्मेदारी से विद्यार्थियों के लिए रुचिकर तरीके से करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के दृष्टिकोण से NCERT द्वारा तैयार किया गया गणित विषय का पाठ्यक्रम/पाठ्य पुस्तकें लागू की गई हैं, जो कि विद्यार्थी केंद्रित गतिविधि आधारित सीखने की प्रक्रिया पर जोर देती है। किन्तु अधिकांश शिक्षक पाठ्य पुस्तकों में पाठों में दिए गए क्रिया कलाप/गतिविधियां कक्षा में नहीं कराते हैं, जिससे विद्यार्थियों में न तो जिज्ञासा उत्पन्न होती है और न ही उनकी रुचि जागृत हो पाती है। इससे गणित का शिक्षण विद्यार्थियों के लिए नीरस एवं बोझिल हो जाता है तथा विद्यार्थी रटने को मजबूर होते हैं। अतः सभी शिक्षकों को पाठ्य पुस्तक के प्रत्येक पाठ की योजना बनाकर कक्षा में विद्यार्थियों के लिए सुचारू रुप से गतिविधि आधारित शिक्षण संचालित करना चाहिए। हमारा कार्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना ही नहीं है, वरन् गणित में जब हम विद्यार्थियों को जोड़ना सिखाते हैं, तो उन्हें अपने जीवन में अच्छे गुणों को जोड़ना तथा घटाना सिखाते समय अपने जीवन में अवगुणों को त्यागना/कम करना भी समझाना चाहिए।इसके पूर्व गणित विभाग के प्राध्यापक डॉ अश्विनी गर्ग ने कहा कि गणित विषय के शिक्षक कक्षा में भय का वातावरण नहीं बनाएं। यदि बच्चों को कक्षा में रुचिकर तरीके से गणित पढ़ाएंगे तो विद्यार्थी जल्दी सीखेंगे और उनमें आत्मविश्वास की वृद्धि होगी। इस अवसर पर क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल के प्राचार्य प्रोफ़ेसर शिव कुमार गुप्ता भी उपस्थित थे तथा संस्थान की प्राध्यापक श्रीमति रत्नमाला आर्य ने आभार व्यक्त किया गया।

