
नर्मदापुरम / अपने कार्य को निष्ठा के साथ करना और जीवन में सत्य का आचरण करना ही सत्य नारायण भगवान की सच्ची पूजा है। यह बात पं. प्रमोद शर्मा ने सोमवार को जगन्नाथ मंदिर में आयोजित प्रवचन माला के समापन अवसर पर कही।
भगवान सत्य नारायण की कथा के संकेत और जीवन में प्रासंगिकता की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सत्य नारायण भगवान की में प्रथम एक लकड़हारे की कथा है। लकड़हारा समाज के श्रमिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। वह कष्ट में है, लेकिन जैसे ही उसके जीवन में भगवान की पूजन का संकल्प आता है, उसके जीवन में बदलाव आ जाता है, कार्य के प्रति निष्ठा भी जागती है और जीवन में मंगल होता है।
कथा में दूसरा और प्रमुख पत्र साधु बनिया और उसकी पुत्री है। यह यह सामान्य गृहस्थ और व्यवसायी परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। वे बार बार असत्य भाषण करता है और संकटों से घिरता है। संदेश यह है कि हमें जीवन में सदैव सत्य ही बोलना चाहिए। कथा में तीसरा संवाद एक राजा का है, जो अपने कर्तव्य से विमुख होता है और कष्ट झेलता है। सम्पूर्ण कथा का सार संदेश यह है कि जीवन से अपने कर्तव्यों का पालन करना, सत्य का अनुसरण करना और समाज को ही परिवार मानना।
ज्ञात रहे कि जगन्नाथ मंदिर में संपूर्ण पुरुषोत्तम माह सराय नारायण कथाओं का आयोजन किया गया, जिसमें तीन सौ से अधिक परिवारों के कथाएं की। कार्यक्रम का समापन खाटू श्याम संध्या और भंडारे से साथ हुआ।

