
नर्मदापुरम / नगर पालिका के कुछ कर्मचारी लखपति बनने की राह पर हैं। शहर की जिन सड़कों पर हम जाम से जूझते हैं, उन्हें नगर पालिका के भ्रष्ट तंत्र ने बाकायदा किराए पर चढ़ा रखा है। नर्मदापुरम नगर पालिका में इस वक्त अतिक्रमण और हफ्ता वसूली’ का खेल चल रहा है, जिसने रक्षक को ही भक्षक बना दिया है। सड़कों को साफ रखने का दावा करने वाले हुक्मरानों की नाक के नीचे कलेक्ट्रेट से लेकर शिक्षण संस्थानों तक भ्रष्टाचार की समानांतर सरकार चल रही है।
भ्रष्टाचार का भूगोल, जहां कानून की धज्जियां उड़ती हैं….
नगर पालिका के भ्रष्ट कारिंदों ने शहर के वीआईपी और संवेदनशील इलाकों को अपनी अवैध कमाई का ‘चारागाह’ बना लिया है। कलेक्टर कार्यालय के सामने जहां से पूरे जिले की कानून व्यवस्था चलती है, ठीक उसी के सामने नपा के संरक्षण में अवैध टपों का साम्राज्य है। गर्ल्स स्कूल, एसएनजी स्कूल और नर्मदा महाविद्यालय देश का भविष्य गढ़ने वाले इन शिक्षण संस्थानों के सामने छात्राओं की सुरक्षा को ताक पर रखकर अवैध दुकानें सजवाई गई हैं। इंदिरा चौक, पुराना बस स्टैंड, पहले टायर के सामने और मीनाक्षी चौक (मंदिर के पास) इन व्यस्ततम इलाकों में पैर रखने की जगह नहीं है, क्योंकि यहां की जमीन नपा कर्मचारियों ने ‘बेच’ खाई है।
माफिया राज, ‘अपनों’ को मलाई, गरीबों पर तबाही….
इस पूरे खेल में नगर पालिका के कर्मचारियों ने अपने सगे रिश्तेदारों, सालों और परिचितों के ‘टपे’ और दुकानें इन मुख्य मार्गों पर सजवा रखी हैं। मीनाक्षी चौक पर मंदिर के आसपास ही कर्मचारियों के चहेतों ने टपे स्थाई रूप से खड़े कर दिए हैं। नियमों का दोहरा चरित्र देखिए रसूखदारों के लिए नगर पालिका के कर्मचारी खुद खड़े होकर अपने रिश्तेदारों की दुकानें लगवाते हैं, ताकि उनकी ऊपरी कमाई का जरिया फिक्स रहे। इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी के लिए हाथ ठेला चलाने वाले किसी गरीब की नपा के इन ‘वसूली भाईयों’ के आगे एक नहीं चलती। उनका ठेला बेरहमी से पलट दिया जाता है या जब्त कर लिया जाता है। बंदरबांट का गणित आर.आई. से लेकर ड्राइवर तक ‘सबका साथ, सबका विकास जब किसी गरीब का ठेला जब्त कर आईटीआई के पास टीचिंग ग्राउंड (ट्रेंचिंग ग्राउंड) ले जाया जाता है, तो वहां शुरू होता है असली ‘उगाही का तांडव’। बिना किसी सरकारी रसीद के, गरीब ठेले वाले से 500 से लेकर 1000 तक की सीधी मांग की जाती है।
खुलासा-रकम की बंदरबांट….
तीन हिस्सों में बंटती है लूट की रकम सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस अवैध उगाही की रकम का बंदरबांट पहले से तय है। पहला हिस्सा जब्ती वाहन का भ्रष्ट ड्राइवर। दूसरा हिस्सा क्षेत्र का कथित तौर पर जिम्मेदार राजस्व निरीक्षक और तीसरा हिस्सा परदे के पीछे बैठा नगर पालिका का एक अन्य रसूखदार कर्मचारी। यह तिकड़ी मिलकर हर दिन हजारों रुपए डकार रही है। वसूली के लिए बकायदा रखा है ‘कलेक्टर’ (गुर्गा) यह सिंडिकेट इतना संगठित हो चुका है कि नगर पालिका के इन सफेदपोश कर्मचारियों ने हर हफ्ते और हर महीने ‘हफ्ता वसूली’ करने के लिए अपने निजी गुर्गे (प्राइवेट आदमी) रखे हैं। यह आदमी हर महीने बराबर इन अवैध टप वालों और दुकानदारों के पास जाता है, नपा कर्मचारियों के नाम की धौंस देता है और लिफाफा जेब में डालकर लौट आता है। जो पैसा देता है, उसका अतिक्रमण ‘वैध’, जो नहीं देता, उसका धंधा उजाड़ दिया जाता है।
इनका कहना है….
अतिक्रमण कर रखे टपों को हटाने की कार्यवाही की जा रही है । जल्द इन्हें जप्त किया जाएगा और जहां भी ऐसे अतिक्रमण हो रहा है उन्हें तुरंत हटाने की कार्यवाही होगी।
हेमेश्वरी पटले….
मुख्य नगर पालिका अधिकारी नर्मदापुरम।

