

नर्मदापुरम / जिला मुख्यालय पर पहली बार आयोजित की गई जिला स्तरीय ‘आम प्रदर्शनी’ उद्यानिकी विभाग की लापरवाही के कारण पूरी तरह फ्लॉप शो साबित हुई। आम जो कि गर्मी का राजा कहलाता है
। सेठानी घाट स्थित तिलक भवन के सामने शनिवार को लगाई गई। इस प्रदर्शनी को लेकर विभाग ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन उद्घाटन के बाद पूरा पंडाल सूना पड़ा रहा। प्रचार-प्रसार के अभाव में आम जनता तो दूर, शहर के जागरूक नागरिक तक इस आयोजन से अनजान रहे। सबसे शर्मनाक स्थिति दोपहर के समय देखने को मिली, जब जनता के लिए लगाई गई प्रदर्शनी में विभाग के अधिकारी-कर्मचारी वीआईपी कुर्सियों पर बैठे और सामने रखी टेबल पर पैर रखकर आराम करते नजर आए। जिस आयोजन का उद्देश्य जिले के किसानों की मेहनत और आम उत्पादन की विविधता को जनता तक पहुंचाना था, वह विभागीय सुस्ती और लापरवाही के कारण महज औपचारिकता बनकर रह गया।
पहली बार जिला मुख्यालय में लगी है प्रदर्शनी…..
उल्लेखनीय है कि उद्यानिकी विभाग द्वारा आम की यह प्रदर्शनी हर वर्ष पर्यटन नगरी पचमढ़ी में आयोजित की जाती रही है। वहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और आमजन विभिन्न किस्मों के आम देखने पहुंचते थे। इस बार जिला प्रशासन की पहल पर इसे पहली बार नर्मदापुरम जिला मुख्यालय पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया था, ताकि स्थानीय नागरिक भी जिले में पैदा होने वाली आम की किस्मों से परिचित हो सकें।
प्रदर्शनी में करीब 40 से अधिक प्रजातियों के आम टोकरियों में सजाकर रखे गए थे। प्रत्येक टोकरी के नीचे आम की किस्म का नाम भी लिखा गया था। आयोजन देखने में भव्य जरूर था, लेकिन जनता की अनुपस्थिति ने पूरी तैयारी और विभागीय गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। दावा किया गया था कि स्टॉल में नर्मदापुरम जिले में पैदा होने वाली आम की किस्मों को प्रदर्शित किया गया है, लेकिन मौके पर यह चर्चा रही कि वैरायटी की संख्या बढ़ाने और वाहवाही लूटने के लिए नरसिंहपुर सहित अन्य पड़ोसी जिलों से भी आम लाकर प्रदर्शनी में शामिल किए गए। यदि ऐसा है, तो यह स्थानीय जनता को गुमराह करने जैसा है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनी में रखी गई सभी किस्में वास्तव में नर्मदापुरम जिले की थीं या दूसरे जिलों से भी आम मंगाए गए थे।
दोपहर को छा गया सन्नाटा…..
शनिवार सुबह प्रदर्शनी का शुभारंभ कलेक्टर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया। फीता काटा गया, अधिकारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभागीय प्रयासों की सराहना भी हुई। लेकिन जैसे ही मुख्य अतिथि रवाना हुए, आयोजन की असली तस्वीर सामने आने लगी। दोपहर होते-होते पंडाल में सन्नाटा छा गया। न दर्शक नजर आए, न उत्सुक नागरिक और न ही किसानों से संवाद की कोई सक्रिय व्यवस्था दिखाई दी। जिस प्रदर्शनी में शहरवासियों की भीड़ होनी चाहिए थी, वहां खाली कुर्सियां और सुस्त पड़े कर्मचारी ही दिखाई दिए। इतने महत्वपूर्ण आयोजन के बावजूद उद्यानिकी विभाग द्वारा शहर में कोई प्रभावी प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। न मुनादी कराई गई, न पर्याप्त पोस्टर-बैनर दिखे और न ही स्थानीय स्तर पर लोगों को आमंत्रित करने की ठोस व्यवस्था नजर आई। नतीजा यह रहा कि शहर के अधिकांश लोगों को पता ही नहीं चला कि सेठानी घाट पर जिले की आम प्रदर्शनी लगाई गई है। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य किसानों को पहचान दिलाना और स्थानीय लोगों को जिले की आम संपदा से परिचित कराना था। नर्मदापुरम जिले में आम की कई बेहतरीन किस्में पैदा होती हैं, लेकिन जागरूकता और बाजार व्यवस्था की कमी के कारण किसान अक्सर अपना माल खेतों से ही बड़े व्यापारियों को कम दामों में बेच देते हैं। ऐसे आयोजन किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संबंध बना सकते थे, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह अवसर भी हाथ से निकल गया। लाखों रुपये के सरकारी संसाधनों और विभागीय तैयारी के बावजूद यह प्रदर्शनी अपने उद्देश्य से भटक गई। जनता के टैक्स के पैसे से आयोजित कार्यक्रम में जनता ही नहीं पहुंची। जहां लोगों को आम की किस्मों से परिचित कराया जाना था, वहां विभागीय कर्मचारी टेबल पर पैर रखकर आराम फरमाते दिखाई दिए। यह पूरा मामला उद्यानिकी विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करता है या इस आयोजन को भी सिर्फ कागजी खानापूर्ति मानकर छोड़ दिया जाएगा।

