

नर्मदापुरम / रिहायशी माहौल और यातायात नियमों को दरकिनार करते हुए नर्मदापुरम की एक प्रतिष्ठित कॉलोनी में भारी वाहनों के अवैध ठहराव ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मालाखेड़ी स्थित पॉश ‘रिवर व्यू कॉलोनी’ में इन दिनों खाली पड़े भूखंडों (प्लाट्स) का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। जिस शांत रहवासी इलाके में लोग सुकून से रहते हैं, वहां दिन-रात भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही से स्थानीय निवासी बेहद त्रस्त हैं।
खाली प्लॉट बने वाहनों का डेरा: रात-दिन बसों और ट्रैक्टरों की…..
आवाजाही कॉलोनी के निवासियों के मुताबिक, क्षेत्र में स्थित खाली पड़े भूखंडों को बिना किसी अनुमति के ट्रैक्टरों और निजी बसों का पार्किंग स्थल बना दिया गया है, जिससे रहवासी बेहद परेशान हैं। ट्रैक्टरों की तेज रफ्तार शो-रूम के नए ट्रैक्टरों को कॉलोनी के अंदर लाकर खाली प्लॉटों पर डंप किया जा रहा है। जब ये भारी वाहन रिहाइशी सड़कों से गुजरते हैं, तो इनकी गति इतनी तेज होती है कि हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। 24 घंटे बसों का आना-जाना खाली पड़े इन प्लॉटों पर शिफ्ट के हिसाब से बसों की पार्किंग की जा रही है। जो बसें दिनभर रूट पर दौड़ती हैं, वे देर रात कॉलोनी में आकर खड़ी हो जाती हैं और रात में चलने वाली बसें दिन के वक्त यहाँ डेरा जमा लेती हैं। इस लगातार आवाजाही के कारण पूरी कॉलोनी की शांति भंग हो चुकी है। घरों में कैद मासूम, बुजुर्गों ने छोड़ी मॉर्निंग वॉक भारी वाहनों के इस अवैध ठहराव के कारण कॉलोनी का सुरक्षित माहौल पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
हादसों के डर से बुजुर्गों और महिलाओं ने सुबह-शाम की मॉर्निंग वॉक करना बंद कर दिया……
हवा में लगातार उड़ती धूल और भारी इंजनों के कानफोड़ू शोर के कारण लोग अपने घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखने को मजबूर हैं। छोटे-छोटे बच्चों के माता-पिता बेहद चिंतित हैं। दुर्घटना के डर से मासूमों को पार्कों और सड़कों पर खेलने से रोककर घरों में ही कैद कर दिया गया है। प्रशासनिक अनदेखी से आक्रोश, जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमों के मुताबिक रिहाइशी क्षेत्रों में व्यावसायिक भारी वाहनों का इस तरह का ठहराव पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। इसके बावजूद वीआईपी क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे यह सब चल रहा है। प्रभावित निवासियों ने इस संबंध में प्रशासन और यातायात विभाग को कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
निवासियों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस रिहाइशी इलाके से ट्रैक्टरों और बसों के इस अवैध ठहराव को नहीं हटवाया, तो वे अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन स्थानीय जनता की इस जायज परेशानी को कितनी गंभीरता से लेता है और इन भारी वाहनों को रिहाइशी इलाके से बाहर करने के लिए क्या कदम उठाता है।

