
नर्मदापुरम / शासकीय कन्या महाविद्यालय सिवनी मालवा में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर ईको क्लब के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में जैव विविधता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि प्रत्येक वर्ष 22 मई को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को पृथ्वी पर मौजूद विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं, पौधों, सूक्ष्मजीवों एवं पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष की थीम वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य” रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि स्थानीय स्तर पर किए गए संरक्षण प्रयास वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण पूरी मानव जाति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। तेजी से बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई, जल स्रोतों के क्षरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण जैव विविधता निरंतर प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जैव विविधता का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकटों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनते हुए अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाने की प्रेरणा दी।
ईको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बलापुरे ने अपने संबोधन में कहा कि जैव विविधता केवल पौधों और जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण जीवन चक्र का आधार है। प्रकृति में उपस्थित प्रत्येक जीव एवं वनस्पति पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानव गतिविधियों के कारण प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है, जिससे अनेक प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं। उन्होंने छात्राओं से अधिक से अधिक पौधारोपण करने, जल संरक्षण अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
ईको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही वैश्विक स्तर पर बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, प्लास्टिक उपयोग में कमी, जैविक खेती को बढ़ावा, स्थानीय एवं औषधीय पौधों का संरक्षण तथा स्वच्छता जैसी गतिविधियाँ पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने छात्राओं को जैव विविधता के महत्व को समझते हुए समाज में जनजागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को महाविद्यालय परिसर में उपलब्ध विभिन्न औषधीय एवं उपयोगी पौधों की जानकारी प्रदान की गई। छात्राओं ने जैव विविधता संरक्षण से संबंधित अपने विचार व्यक्त किए तथा प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष चर्चा की गई। इस अवसर पर छात्राओं को पौधों का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया तथा उन्हें पौधों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।
छात्राओं ने जैव विविधता संरक्षण को मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। मंच संचालन डॉ. मनीष दीक्षित एवं आभार प्रदर्शन डॉ. गजेंद्र वाईकर द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मनोज प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. सीमा तोमर, डॉ. दुर्गा मीणा, श्रीमती संगीता कहार, श्रीमती विमला कदम, शशांक गौर, ईको क्लब इकाई की छात्राएँ एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

