
नर्मदापुरम / जनपद पंचायत माखननगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत आंचल खेड़ा इन दिनों एक बड़े वित्तीय घोटाले और प्रशासनिक खींचतान का केंद्र बन गई है। वर्तमान मनोनीत सरपंच आशा घुरेले ने पूर्व सरपंच के भाई पर पद का दुरुपयोग करते हुए 1 करोड़ 30 लाख रुपये के गबन का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इस मामले की लिखित शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) समेत जिले के आला अधिकारियों से की गई है। क्या है पूरा मामला? (फर्जी हस्ताक्षर से खेल) सरपंच आशा घुरेले के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2021-22 का है। तत्कालीन सरपंच रामलाल यादव के कार्यकाल (दिनांक 2 फरवरी 2021 से) के दौरान उनके सगे छोटे भाई ओमप्रकाश यादव ने कथित तौर पर एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। आरोप है कि ओमप्रकाश यादव ने तत्कालीन सरपंच रामलाल यादव के फर्जी हस्ताक्षर कर और पूर्व सचिव प्रेमनारायण यादव की मिलीभगत से ग्राम पंचायत के खातों से लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मोटी राशि का अवैध आहरण (Withdrawal) कर लिया।
काम नहीं करने दिया जा रहा, मिल रही है मानसिक प्रताड़ना…….. वर्तमान सरपंच आशा घुरेले ने प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे पत्र में अपनी जान-माल और मानसिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है – चूंकि मैं वर्तमान में मनोनीत सरपंच के रूप में दायित्व संभाल रही हूँ, इसलिए पूर्व सरपंच पक्ष के लोग मुझे निशाना बना रहे हैं। वर्तमान क्षेत्रीय जनपद सदस्य राजकुमारी यादव (पत्नी ओमप्रकाश यादव) द्वारा मेरे खिलाफ लगातार झूठी और भ्रामक शिकायतें की जा रही हैं। मुझे जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया जा रहा है कि मैं अपना शासकीय कार्य सुचारू रूप से नहीं कर पा रही हूँ। निष्पक्ष जांच और एफआईआर (FIR) की मांग सरपंच ने जिला प्रशासन, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि फॉरेंसिक जांच वर्ष 2021-22 के दौरान बैंक से निकाले गए पैसों और उन पर किए गए हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। आपराधिक मामला शासकीय धन का गबन करने और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करने के आरोप में दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही हो। प्रशासनिक संरक्षण झूठी शिकायतों के आधार पर हो रहे मानसिक उत्पीड़न से उन्हें मुक्ति दिलाई जाए ताकि वे पंचायत के विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकें।आगे क्या? एक ग्रामीण पंचायत में ₹1.30 करोड़ जैसी भारी-भरकम राशि का गबन प्रशासनिक सतर्कता पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक जांच कमेटी गठित करता है और दोषियों पर क्या शिकंजा कसता है।

