


सिवनी मालवा / ग्राम लोखरतलाई के अंतर्गत आने वाला आदिवासी बहुल्य टोला सीरूपुरा इन दिनों गंभीर जल संकट से गुजर रहा है। लगभग 300 की आबादी वाले इस टोले में पेयजल के सभी स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन अत्यंत कठिन हो गया है। आदिवासी बच्चे महिलाएं एक किलोमीटर दूर किसान के खेत में लगे नलकूप से पानी लाने को मजबूर हैं ।
हैंडपंप बने शोपीस, दो साल से बंद….
गांव के स्कूल सहित तीन हैंडपंप पिछले करीब दो वर्षों से खराब पड़े हैं, लेकिन अब तक उनकी मरम्मत नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पीएचई विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
नल-जल योजना भी हुई फेल…..
सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी सीरूपुरा में दम तोड़ चुकी है। पिछले चार महीनों से पानी का स्रोत सूख जाने के कारण सप्लाई बंद है, जिससे लोगों की उम्मीदें भी खत्म होती जा रही हैं।
1 किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर…..
गांव के लोग रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर खेतों में लगे निजी नलकूप से पानी भरकर ला रहे हैं। इस प्रक्रिया में महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। आदिवासी महिलाओं की पानी की दिक्कत को देखते हुए पास ही के खेत मलिक सरवन कहार अपने खेत में लगे नलकूप से पीने का पानी उपलब्ध करा रहे हैं ।
बिजली पर निर्भर रसोई, भूखे रहने की नौबत……
गांव की स्थिति इतनी खराब है । नल जल योजना और गांव में लगे हैंडपंप बंद है । अब पीने के पानी का एक मात्र स्तोत्र खेतों में लगे नलकूप है । यहीं से आदिवासी महिला और बच्चे पीने का पानी लेकर आते हैं । लेकिन यह पानी की व्यवस्था भी बिजली आने पर ही निर्भर रहती है । बिजली आने पर ह चूल्हा जल पाता है। यहां बिजली की व्यवस्था भी अनियमित है—एक सप्ताह दिन में बिजली मिलती है तो दूसरे सप्ताह रात में। ऐसे में जब तक बिजली नहीं आती, कई आदिवासी परिवारों के घरों में भोजन तक नहीं बन पाता।
शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ समाधान……
सरपंच प्रतिनिधि रवि गुप्ता ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर पीएचई विभाग के अधिकारियों, स्थानीय विधायक और एसडीएम को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
सीरूपुरा की स्थिति प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
तत्काल समाधान की मांग……
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
बंद पड़े हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, नल-जल योजना के स्रोत को पुनर्जीवित किया जाए, वैकल्पिक जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए अगर जल्द ही समाधान नहीं हुआ, तो यह संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।
पीएचई विभाग क प्रभारी एसडीओ उमेश कोबले ने बताया कि पीने के पानी के लिए नल जल योजना के अंतर्गत खोदे गए बोर का कल ही परीक्षण कर लेंगे और यदि संभव हुआ तो बंद पड़े हैंडपंप भी चालू कर दिए जाएंगे ।

