

नर्मदापुरम / सरकारी दफ्तरों की चौखट पर अक्सर फरियादी सूखे गले और थके कदमों के साथ घंटों इंतजार करते नजर आते हैं। लेकिन मंगलवार को नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट में जो दृश्य देखने को मिला, उसने प्रशासन की पारंपरिक छवि को पूरी तरह बदलकर रख दिया। जिले के कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जनसुनवाई को सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया न मानते हुए उसे “मानवता का उत्सव” बना दिया। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीणों के लिए वे खुद राहत की ठंडी छांव बनकर सामने आए।
कुर्सी से पहले सम्मान, शिकायत से पहले राहत……
दोपहर की तपती धूप में जब बुजुर्ग और पीड़ित कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्हें वही पुराना इंतजार नहीं, बल्कि एक बदला हुआ माहौल मिला।
कलेक्टर सोमेश मिश्रा अपनी सीट से उठे, हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक बैठाया और उनकी बात सुनने से पहले खुद आगे बढ़कर ठंडा पानी और शरबत पिलाया।
यह सिर्फ एक छोटा सा कदम नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि प्रशासन का पहला कर्तव्य इंसानियत है।
बुजुर्ग की आंखों में छलके आंसू……
जनसुनवाई में आए बुजुर्ग रामदास इस व्यवहार से भावुक हो उठे। उन्होंने कहा:
“साहब ने हमें बिठाया, ठंडा पानी और शरबत पिलाया, फिर बड़े अपनेपन से हमारी समस्या सुनी। सरकारी दफ्तर में ऐसा सम्मान मिलेगा, कभी सोचा नहीं था।”
उनकी आंखों में आए आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह अनुभव उनके लिए कितना खास था।
क्यों बन रही है ये पहल चर्चा का विषय।
मानवता सर्वोपरि: कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने दिखाया कि पद से पहले संवेदनशीलता जरूरी है।
तत्काल कार्रवाई:
केवल सत्कार ही नहीं, समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों को मौके पर ही सख्त निर्देश दिए गए। बदली सोच: इस पहल ने जनता और प्रशासन के बीच की दूरी और डर को काफी हद तक खत्म कर दिया।
एक मिसाल, पूरे प्रदेश के लिए संदेश….
अक्सर फाइलें और नियम आम जनता और प्रशासन के बीच दीवार बन जाते हैं, लेकिन नर्मदापुरम में कलेक्टर सोमेश मिश्रा की यह पहल साबित करती है कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी व्यवस्था भी आम आदमी के लिए “अपना घर” बन सकती है।

