
सिवनी मालवा / एक ओर जहां अंग्रेजों के जमाने में हिरनखेड़ा में इंटरमीडिएट आवासीय विद्यालय था। उस समय हिरनखेड़ा में स्कूली व्यवस्था के साथ-साथ विद्यार्थियों की आवासीय व्यवस्था भी थी । लेकिन आजादी के बाद ग्राम हिरनखेड़ा में आज भी इंटरमीडिएट स्कूल का भवन नहीं है । राजनीतिक द्वेशिता के चलते स्वीकृत भवन कहीं और बनवा दिया गया। आजादी के पहले शिक्षा के क्षेत्र में हब कहलाने वाला हिरनखेड़ा लापरवाही की भेंट चढ़ और विद्यार्थियों का शिक्षा स्तर बिगड़ता चला गया।
दानदाता ने भूमि दान दी फिर भी नहीं बना इंटरमीडिएट स्कूल……
अंग्रेजों के जमाने में राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की आवासीय स्कूल व्यवस्था चलती रही। लेकिन देश की आजादी के बाद आवासीय संरक्षण की व्यवस्था बंद हो गई। दादा की महत्वपूर्ण विरासत सेवा सदन विद्या मंदिर हिरनखेड़ा की जमीन विक्रय कर दी गई। 70 के दशक में ग्रामवासियों द्वारा सरकार से गांव में फिर से स्कूल स्थापित करने की मांग जोर-शोर से की गई । 5 जनवरी 1981 को ग्राम हिरनखेड़ा में हायर सेकेंडरी विद्यालय पंडित जी के नाम पर स्थापित किया गया । तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवालय भवन में यह स्कूल संचालित होने लगा। यही नहीं तत्कालीन सरपंच श्री बिजोरिया द्वारा 3 एकड़ जमीन शासन को हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण के लिए दान की गई। किंतु फिर भी भवन निर्माण नहीं हो पाया। 90 के दशक में कन्या शाला के नवीन भवन निर्माण हेतु शासन से मंजूरी मिली ।
द्वेष पूर्ण राजनीति और लापरवाह अधिकारियों की भेंट चढ़ा स्कूल
सन 1991 में इस स्कूल के भवन निर्माण हेतु आवश्यक मंजूरी मिली। किंतु दुर्भाग्य से तत्कालीन राजनीतिक दबाव एवं अन्य कारणों से यह स्कूल भवन का निर्माण अन्यत्र स्थान पर कर दिया गया । ग्राम हिरण खेड़ा से स्कूल का भवन ही नहीं छीना गया, बल्कि इस हायर सेकेंडरी स्कूल को डिमोशन करते हुए इसे हाई स्कूल में परिवर्तित कर दिया गया। ग्रामवासियों ने विभिन्न स्तरों पर विरोध किया और वापस से 20 साल बाद सन 2011 में शाला का उन्नयन कर पुनः हायर सेकेंडरी स्कूल की पुर्न स्थापना की गई। सन 2018 में फिर से शासन स्तर से इस विद्यालय को नवीन भवन आवंटित हुआ, भवन निर्माण हेतु लेआउट भी डाला गया । किंतु फिर से राजनीतिक नजरें तिरछी रहीं और इस आवंटित भवन को अन्यत्र निर्माण कर दिया गया। हिरनखेड़ा जोकि आदिवासी क्षेत्र का एक मुख्य केंद्र प्रधान ग्राम है।
शैक्षणिक स्थल में पुरानी पहचान रही है……..
हिरनखेड़ा एक प्रमुख गांव के रूप में जिले में पहचाना जाता है। आज भी राष्ट्रकवि दादा माखनलाल चतुर्वेदी के नाम पर संचालित भवन की हालत जीर्ण शीर्ण हो रही है। नवीन भवन आज तक हिरनखेड़ा को नहीं मिल पाया है। वर्तमान सरपंच अमृता लिटोरिया द्वारा बताया गया है कि मैंने शासन प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से इस महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान देने के लिए आवश्यक पत्राचार किया है। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्म स्थली पर स्थापित उनके नाम से संचालित विद्यालय के भवन हेतु नवीन भवन निर्माण हेतु शीघ्र अति शीघ्र मंजूरी मिलनी चाहिए ताकि शिक्षा के क्षेत्र में पहचाने जाने वाले इस महत्वपूर्ण गांव को एक अच्छे विद्यालय की सुविधा मिल सकेगी।

