नर्मदापुरम / हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) भगवान हनुमान के जन्म की खुशी में मनाई जाती है, जो शक्ति, साहस और निस्वार्थ भक्ति के प्रतीक हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को माता अंजनी और केसरी के पुत्र के रूप में बजरंगबली का जन्म हुआ था। यह पर्व रामभक्त हनुमान की कृपा पाने, संकटों से मुक्ति और बल-बुद्धि की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।
हनुमान जयंती मनाने के मुख्य कारण और महत्व……
जन्म का उत्सव (Janmotsav)…
मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने 11वें रुद्रावतार के रूप में अवतार लिया था।
शक्ति और भक्ति के प्रतीक……
हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं, इसलिए उनकी पूजा से निस्वार्थ सेवा और समर्पण की सीख मिलती है।
अमरता का वरदान (विजय अभिनन्दन)……
कई जगहों पर हनुमान जी को माता सीता द्वारा अमरता का वरदान मिलने (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) के उपलक्ष्य में भी यह त्योहार मनाया जाता है।
संकटमोचन की पूजा……
भक्त इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और चोला चढ़ाते हैं ताकि हनुमान जी उनके कष्टों को दूर करें।
हनुमान जयंती हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और साहस से किसी भी असंभव कार्य को पूरा किया जा सकता है।

