


नर्मदापुरम / नव संवतसर, गुडी पडवा के पावन अवसर पर विगत 21वर्षो की भांति इस वर्ष भी साहित्यक आयोजन की श्रंखला मे साहित्य, संस्कृति, रचनात्मक कार्यों को समर्पित नर्मदा आव्हान सेवा समिति व्दारा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन को सेठानी घाट पर धर्माचार्य सौमेश परसाई के मुख्य आतिथ्य मे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप मे वरिष्ठ समाजसेवी डाँ. अतुल सेठा, हंस राय की उपस्थिति में हुआ। नर्मदा आव्हान सेवा समिति मुक्त कंठ से कार्यक्रम की सराहना करते हुए आयोजक केप्टिन करैया को बधाई देते हुए कहां की ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कवि गण भी रात्रि जागरण कर जन जागरण करते हैं यह भी साहित्यिक अनुष्ठान जब लोग सोते है तब कवि जागते हुए जन जागरण करते है। उन्होंने कहा सनातन धर्म में साहित्य का विशेष महत्व है। साहित्य से समाज मे जाग्रति आती है। इसलिए साहित्यकारों का समाज मे विशेष योगदान है। इस दौरान निरंतर 21वर्षों से कुशलता पूर्वक उत्कृष्ट संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि कौशल सक्सेना को स्व. संतोष इंकलाबी स्मृति साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ डाँ. रानू रुही जबलपुर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की कवि सम्मेलन मे कवियो ने रात्री तीन बजे तक गीत, गजल, हास्य व्यंग्य, ओज की रचनाओं से श्रोताओ को भाव विभोर किया। कवि सम्मेलन में 11 कवियों ने कविता पाठ किया कौशल सक्सेना ने कहा “माता पिता के विश्वास को ठगना मत,प्यार भले कर लेना पर भगन मत” अपनी कविता पर श्रोताओ को खूब ताली बटोरी एंव वाहवाही हुई। राजस्थान से आये वरिष्ठ हास्य कवि डाँ. आदित्य जैन ने कहा “अकबर भी डर गया, तेरी छाती के नापसे,चट्टान भी पिघल गयी, संसो के ताप से।मिट्टी मे गिरा खून तो हल्दी महक उठी, धरती ये धन्य हो गई, राणा प्रताप से” सहित अन्य रचनाओ पर हंसा हसाकर लोटपोट कर दिया। भोपाल से हास्य कवि दीपक दनादन ने “प्यार मोहब्बत वाला बनता दुनिया में यदि बम। खून बहाते नहीं सभी को गले लगाते हम”। अपनी कविता पर श्रोताओ को खूब ताली बटोरी एंव वाहवाही हुई। देवनगर से आये हास्य व्यंग्य के कवि दिनेश याज्ञिक ने कहा ” खोखले नारों से हिंदू एक नहीं हो पाएंगे। नहीं हुऐ तो भूमंडल पर सेफ नहीं हो पाएंगे। नारों की सच्चाई अब कसौटी पर टिकनी चहिए।
मरघट पंगत देवालयों में समरसता दिखनी चहिए”
प्रसिद्ध गीतकार पं.महेंद्र मधुर आष्टा ने शौर्य का नाद होता नहीं दिख रहा, ओर सव्वाद होता नही दिख रहा, राष्ट्र की चेतना फंस गई रील में, कोई आजाद होता नही दिख रहा, खूब सराही गई उनके गीतों पर श्रोता गुनगुने पर मजबूर हो गये। छत्तीसगढ़ से आये ओज कवि मंयक शर्मा ने “बेटे खोजने में रहे कागज वसियतो का बेटियां तो बाप की दवाई खोजती रहीं। उनकी वीर रस की प्रस्तुति पर वंदेमातरम ओर भारत मात की जय घोष हुआ। सिवनी के विनोद सनोडिया अंजान गीतकार
ने जीवन मिला इंसान की काया ही बहुत है, उनसे मिली जो प्रेम की छाया ही बहुत हैं, देंगे खजाने हमको नही ये जरूरी, औलाद को माँ बाप का साया ही बहुत हैं, खूब पसंद की गई। डाँ. रानू रुही ने कहा कि “चाहिए तो ले जाओ कहकहों का ये मौसम, चाबियां नहीं दूंगी दर्द के खजाने की, पर वाहवाही लूटी। नरसिंहपुर से आये हास्य कवि ने विकास बैरागी ने कहा “जिनके. ध्यान मात्र से पूरे होते काम है, ऐसी अम्बे माई को प्रणाम है। अपनी रचनाओं से भाव विभोर किया।रतलाम के दर्शन लोहार ने खूब देशप्रेम की रचना सुनाई।
अंत में मंच से कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे कौशल सक्सेना ने अपने चिर परिचित अंदाज में कवि सम्मेलन का शिखर कलश रखा, उन्होंने वीर रस की कविताओं से राष्ट्रभक्ति का अलख जगाया।
इस अवसर पर आयोजक केप्टन करैया, हंस राय, बलराम शर्मा, सावन कुमार, रामू यादव, कमलेश चौधरी, राजेश तिवारी, मनोज जराठे, सोमदत्त पाठक, रमेश नायडू, मनीष दुबे, आर्दश करैया, कार्तिक कांसकार ने आमंत्रित कवियों का स्वागत किया।
स्वागत भाषण प्रस्तवना केप्टिन करैया ने किया। संचालन बलराम शर्मा ने तथा आभार प्रदर्शन रामेश्वर यादव ने किया। हजारों की संख्या मे तीसरे पहर तक श्रोता उपस्थित थे।

