
नर्मदापुरम / नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा- अर्चना करने का विधान है। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री थीं। सफेद वस्त्र धारण किए मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल शोभायमान है। मां के माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। यह नंदी बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। नवरात्र के प्रथम दिन की उपासना में साधक अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थिर करते हैं, शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है, जिससे योग साधना आरंभ होती है। वहीं मान्यता है कि मां शैलीपुत्री की आराधना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

