
नर्मदापुरम / प्रशासन से शिकायत की लेकिन शिकायतकर्ता को अपने शिकायत के खिलाफ एक भी कार्रवाई होते हुए नहीं दिख रही है। अगर किसी गरीब की शिकायत की जाती, तो प्रशासन आनन फानन में तुरंत कार्रवाई करता है लेकिन सातरास्ते पर चौकसे होटल के अवैध अतिक्रमण को लेकर प्रशासन भी खामोश हो गया है। आखिर प्रशासन क्यों खामोश हुआ जबकि अवैध तरह से होटल के चारों तरफ अतिक्रमण है। शहर के विकास की धुरी माने जाने वाले सतरस्ता चौकसे होटल तक फैले अवैध साम्राज्य पर प्रशासन का ‘पीला पंजा’ पूरी तरह खामोश हो गया है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दावों के बीच, सतरस्ता चौकसे होटल की दूरी अब प्रशासनिक लाचारी और राजनीतिक रसूख की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है। इस पूरे मामले पर सांसद दर्शन सिंह चौधरी और क्षेत्रीय विधायक डा सीता शरण शर्मा की ‘मौन छुट्टी’ (चुप्पी) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता का संरक्षण शहर के विकास से कहीं ऊपर है। सतरस्ते पर पूर्व मंडल अध्यक्ष राजकुमार चौकसे द्वारा अतिक्रमण कर होटल और मेडिकल संचालित किया जा रहा है।
प्रशासन की बेबसी, चौकसे होटल तक थमी कार्रवाई……
नगर पालिका और राजस्व विभाग ने बड़े दावों के साथ सतरस्ता चौक का सौंदर्यीकरण शुरू किया था, लेकिन जैसे ही कार्रवाई का रुख सत रस्ता चौकसे होटल जो पूर्व मंडल अध्यक्ष राजकुमार चौकसे संचालित कर रहे हैं, के अवैध हिस्से की ओर मुड़ा, प्रशासनिक मशीनरी के हाथ-पांव फूल गए। सूत्रों का कहना है कि कागजों में अतिक्रमण चिह्नित होने के बावजूद, प्रशासन होटल की दीवारों को छूने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि सात रस्ता चौकसे होटल का यह मार्ग अब ‘नो-गो जोन’ बन चुका है।
सांसद और विधायक की चुप्पी और रसूख का खेल…..
शहर के विकास की दुहाई देने वाले सांसद दर्शन सिंह चौधरी और क्षेत्रीय विधायक डा. सीता शरण शर्मा ने इस गंभीर मुद्दे से ‘मानसिक चुप्पी ले ली है। चर्चा है कि सतरस्ता चौकसे होटल के बीच फैले इस अतिक्रमण को बचाने के लिए सांसद और विधायक का सीधा वरदहस्त प्राप्त है। जब चौकके अन्य हिस्सों से गरीबों की दुकानें हटाई गईं, तब जनप्रतिनिधि सक्रिय थे, लेकिन होटल के रसूख के सामने दोनों ही दिग्गजों ने चुप्पी साध ली है।
सत्ता के दबाव में ‘मौन’ प्रशासन
यह कोई रहस्य नहीं रह गया है कि प्रशासन केवल आदेशों का इंतजार कर रहा है, लेकिन वह आदेश सांसद और विधायक के कमरों में कैद है। सत रस्ता चौकसे होटल के अवैध निर्माण को अभयदान मिलना यह साबित करता है कि जिले में कानून का राज नहीं, बल्कि रसूखदारों की मर्जी चल रही है।
प्रमुख सवाल जो जनमानस में हैं। सत रस्ता चौकसे होटल का अवैध कब्जा कब हटेगा । सांसद दर्शन सिंह चौधरी और विधायक की (चुप्पी) को पार्टी का खुला संरक्षण नहीं माना जाना चाहिए ?
चल रही होटल और मेडिकल, नाले पर अतिक्रमण….
सतरस्ते पर अतिक्रमण कर होटल चल रही है। नाले के ऊपर भी अवैध अधिकरण कर इसे बंद कर दिया गया है जिससे इसकी सफाई नहीं हो रही है और बारिश में बाढ़ जैसे आसार हो जाते हैं । वहीं मेडिकल भी अवैध रूप से चल रहा है। दूसरे के लाइसेंस पर यह मेडिकल संचालित हो रहा है। वहीं बाजू में दो टप को पीले रंग से रंग दिए गए हैं, जो देखने नगर पालिका के टप लग रहे हैं और उन्हें किराए पर दे दिये गये है ।

