

सिवनी मालवा / मध्यप्रदेश शासन एवं कलेक्टर नर्मदापुरम के निर्देशों के क्रम में सिवनी मालवा तहसील क्षेत्र में नरवाई प्रबंधन को लेकर व्यापक कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा तहसील के प्रत्येक गांव में ग्राम स्तरीय नरवाई प्रबंधन दल का गठन किया गया है, जिसमें कृषि, राजस्व और पंचायत विभाग से जुड़े कर्मचारियों एवं मैदानी अमले की जिम्मेदारियां तय की गई हैं, ताकि फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के तहत ग्राम स्तर पर नरवाई प्रबंधन रजिस्टर संधारित किए जा रहे हैं, वहीं अनुविभागीय स्तर पर विशेष निगरानी दल का गठन भी किया गया है, जो लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर नरवाई जलाने की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है। इसी कड़ी में सोमवार को अनुविभागीय दंडाधिकारी सिवनी मालवा द्वारा तहसील के विभिन्न संवेदनशील गांवों का सघन भ्रमण किया गया। निरीक्षण के दौरान ग्राम रावनपीपल, भरलाय तथा ग्राम पंचायत तिनस्या अंतर्गत ग्राम बेरखेड़ी में खेतों पर पहुंचकर नरवाई अवशेषों के भूंसा मशीन के माध्यम से सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था का जायजा लिया गया और मौके पर इसकी सुनिश्चितता कराई गई।
भ्रमण के दौरान किसानों एवं ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें नरवाई जलाने से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति विस्तार से जागरूक किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नरवाई जलाने से केवल पर्यावरण प्रदूषण और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि भूमि की ऊपरी सतह में मौजूद सूक्ष्म जीव, मित्र कीट तथा पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है और भविष्य में उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई। प्रशासन ने यह भी सख्त संकेत दिए हैं कि यदि किसी कृषक द्वारा शासन के निर्देशों की अवहेलना करते हुए नरवाई अवशेषों का उचित प्रबंधन नहीं किया जाता है अथवा खेत में आग लगाने की घटना सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पर्यावरण नियमों एवं प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज किए जाने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्राम पंचायतों में गठित निगरानी दल तथा राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं, ताकि आगजनी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जन-धन की सुरक्षा, पशुधन की रक्षा और रबी सीजन के दौरान संभावित दुर्घटनाओं की रोकथाम करना है। अनुविभागीय दंडाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि फसल कटाई पूर्ण होने और खेतों से नरवाई अवशेषों के शत-प्रतिशत वैज्ञानिक प्रबंधन तक सतत रूप से जारी रहेगा।

