
नर्मदापुरम / पढ़ने लिखने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती, हर उम्र में इंसान सीखता रहता है। सीखने और सीखाने का कार्य सतत चलता रहता है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने के लिए पढ़ा लिखा होना भी अति आवश्यक है। बचपन में संसाधनों की कमी, गरीबी या अन्य कारणों से जो पढ़ लिख नहीं पाए हैं या मूलभूत साक्षरता को हासिल नहीं कर पाए हैं। उनके लिए केंद्र सरकार द्वारा पूरे भारतवर्ष में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत असाक्षरो को साक्षर बनाकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ये कार्यक्रम हमारे मध्यप्रदेश में भी संचालित है इसी कार्यक्रम के अंतर्गत विकासखंड केसला में 213 सामाजिक चेतना केंद्र संचालित है। जिसमें असाक्षरो को अक्षर साथीयो द्वारा कक्षाएं संचालित कर बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान , डिजिटल साक्षरता, कानूनी साक्षरता, वित्तीय साक्षरता का अध्यापन कार्य कराया जाता है एवं 6 माह पश्चात परीक्षाएं संपन्न होती है। इसी तारतम में 14 मार्च शनिवार को विकासखंड केसला के 213 केंद्रों पर परीक्षाएं हुई। जिसमें लगभग 2,200 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए। परीक्षा का अवलोकन जन शिक्षा केंद्र स्तर पर जन शिक्षकों एवं संकुल समन्वयको ने किया। ब्लॉक स्तर पर विकासखंड साक्षरता सह समन्वयक श्रीमती सुषमा मौर्य ने सामाजिक चेतना केंद्र शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला सनखेड़ा , शासकीय माध्यमिक शाला सोनतलाई, प्राथमिक शाला बिछुआ एवं माध्यमिक शाला बिछुआ का अवलोकन किया। श्रीमती सुषमा मौर्य द्वारा प्रत्येक परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित परीक्षार्थियों से उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम से संबंधित पढ़ाई की अनिवार्यता एवं आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई एवं समस्त परीक्षार्थियों को मोटिवेट किया गया।

