
नर्मदापुरम / नई दिल्ली /मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने संसद के बजट सत्र के दौरान प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के सामने आ रही गंभीर चुनौतियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि MSME क्षेत्र राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय आर्थिक विकास की रीढ़ है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसमें गिरावट देखी जा रही है।
सांसद नारोलिया ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल (URP) पर पंजीकृत MSMEs की संख्या में पिछले दो वर्षों में कमी आई है। उन्होंने कहा, “पंजीकरण रद्द होने के बढ़ते मामले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि कई व्यवसाय बंद हो रहे हैं। इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव लोगों की आजीविका और औद्योगिक स्थिरता पर पड़ रहा है, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।”
श्रीमती नारोलिया ने इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार के समक्ष पाँच सूत्रीय सुझाव रखे जिनमे प्रमुख रूप से:-
1. जागरूकता अभियान चलाया जाए जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान के माध्यम से संचालित किया जाए।
2. वित्तीय व तकनीकी सुगमता हेतु ऋण, सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
3. कौशल एवं नवाचार पर जोर देते हुए उत्पादकता बढ़ाने के लिए कौशल विकास और नवाचार आधारित कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाए।
4. सरल अनुपालन करते हुए डिजिटल ऑन-बोर्डिंग और नियामक बाधाओं को कम कर ‘व्यापार सुगमता’ (Ease of Doing Business) सुनिश्चित की जाए।
5. बाजार एवं क्लस्टर विकास को केंद्र में रखकर MSMEs को सीधे बाजारों से जोड़ने और क्लस्टर विकास के माध्यम से उन्हें और अधिक सशक्त बनाया जाए। सांसद माया नारोलिया ने सरकार से इन उपायों को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया ताकि मध्य प्रदेश में MSMEs के लिए एक अनुकूल वातावरण निर्मित हो सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई शक्ति मिले।

