

पिपरिया / भारत में भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग हैं जो भगवान शिव के अनंत प्रकाश और शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं।ये बारह ज्योतिर्लिंगदेश केअलग-अलग राज्यों में स्थित हैं और हिंदू धर्म में इन्हें अत्यंत पावन तीर्थ स्थल माना जाता है और ये ज्योतिर्लिंगों सोमनाथ सौराष्ट्र गुजरात, मल्लिकार्जुन श्रीशैलम आंध्र प्रदेश, महाकालेश्वर उज्जैन ओंकारेश्वर खंडवा, मध्य प्रदेश केदारनाथ रुद्रप्रयाग उत्तराखंड, भीमाशंकर पुणे महाराष्ट्र, काशी विश्वनाथ वाराणसी, उत्तर प्रदेश त्र्यंबकेश्वर नासिक, वैद्यनाथ देवघर झारखंड, नागेश्वर द्वारका गुजरात, रामेश्वरम तमिलनाडु,
घृष्णेश्वर एलोरा महाराष्ट्र में स्थित है। शिव महापुराण के अनुसार इन बारह पवित्र स्थलों के दर्शन करने से आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उक्त प्रेरक प्रसंग पंडित गोपाल कृष्ण तिवारी द्वारा गांधी वार्ड पाली रोड में चल रही साप्ताहिक शिव महापुराण कथा में आए भक्त जनों को अपने मुखार विंद से अंतिम दिवस की कथा में रसपान कराए। पंडित गोपाल कृष्ण तिवारी ने कथा में बताया कि मुख्य ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मल्लिकार्जुन महाकालेश्वर केदारनाथ और काशी विश्वनाथ को गिना जाता है जो अपने दिव्य महत्व और प्राचीन कथाओं के कारण सबसे महत्वपूर्ण माने जाते है। सोमनाथ मंदिर भारत का पहला ज्योतिर्लिंग मंदिर माना जाता है जो गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित है और चंद्रमा से जुड़ा है। मल्लिकार्जुन श्रीशैलम में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है और शिव-पार्वती का निवास स्थान माना जाता है। उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर काल के स्वामी शिव का रूप है।हिमालय में स्थित केदारनाथ धाम भगवान शिव के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर यह भगवान शिव का एक अत्यंत पूजनीय रूप है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी में एक द्वीप पर स्थित है।वैद्यनाथ धाम रावण से जुड़े वैद्य रूप में भीमाशंकर महाराष्ट्र के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है त्र्यंबकेश्वर गोदावरी नदी के पास नागेश्वर द्वारका के पास रामेश्वर सेतुबंध पर तथाघृष्णेश्वर एलोरा गुफाओं के पास स्थित है।सोमनाथ पहला ज्योतिर्लिंग चंद्रदेव की तपस्या का स्थान। मल्लिकार्जुन शिव-पार्वती का वास स्थल। महाकालेश्वर काल के स्वामी शिव का रूप है। ज्ञात हो कि संगीतमय शिव महापुराण की सात दिवसीय कथा का आयोजन गांधी वार्ड पाली रोड स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर प्रांगण में नायक परिवार द्वारा कराया गया। शिव महापुराण कथा में वैदिक विधि विधान से मत्रों के उच्चारण के साथ पंडित मोनू स्वामी सोनू पाठक मोहित शुक्ला एवं नितिन शास्त्री द्वारा पूजन पाठ एवं हवन संपन्न कराया। इस संगीतमय महाशिवपुराण कथा में सागर से भूपेन्द्र पटेल प्रभु साहू रोहित रॉय पधारे जिन्होंने आर्गन ढोलक तथा पैड पर संगत कर धर्म प्रेमी जनों को अपने स्वर संगीत से भाव विभोर कर दिया। सागर से आये इन कलां कारो का ओमप्रकाश हीरो कुमारी ग्यारसे राजेश कुमार ग्यारसे प्रीति नरेंद्र ग्यारसे ने शाल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। कथा समापन पश्चात् विशाल भंडारे तथा महाप्रसादी का आयोजन किया गया जिसमें जनपद पंचायत कि अध्यक्ष सुश्री संध्या सिंगारे पूर्व पार्षद हारीश बेमन संत भूरा भगत समिति के पदाधिकारियों सहित धर्म प्रेमी जनों ने उपस्थित होकर महा प्रसादी ग्रहण की कार्यक्रम को सफल बनाने में अमरवंशी सोनवंशी ग्यारसे गढ़वाल बान परिवार सहित धर्म प्रेमी जनों वार्ड वासियों का सराहनीय योगदान रहा ।

