
नर्मदापुरम / वुधवार 18 फरवरी 2028 को कृषि उपज मंडी में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के तत्वावधान में कन्याकुमारी से कश्मीर तक की किसान जागृति यात्रा नर्मदापुरम पहुंची। जिसमें संपूर्ण राष्ट्र के राष्ट्रीय किसान नेता सरदार जगजीत सिंह, डल्लैवाल पंजाब, के. शांता कुमार कर्नाटक, पी.आर. पाण्डेय तमिलनाडु, अभिमन्यू कोहार हरियाणा, इन्द्रजीत पुन्नीवाला राजस्थान, नितिन वाल्यान उ.प्र., लीलाधर सिंह राजपूत म. प्र. उपस्थित रहे। सरकार से किसानों की निम्न मांगें हैं कि ——
1). देश के सभी किसानों की सभी फसलों की सम्पूर्ण खरीद MSP पर सुनिश्चित करने के लिए MSP गारंटी कानून बनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2011 में उपभोक्ता मामलों पर बने बर्किंग ग्रुप के चेयरमैन होने के नाते उन्होंने अपनी रिपोर्ट के पॉइंट नम्बर 5.3 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सिफारिश की थी कि ‘किसानों के हितों की रक्षा के लिए वैधानिक प्रावधानों के जरिये यह सुनिश्चित किया जाए कि किसान एवम खरीददार के मध्य फसल खरीद सम्बन्धी लेनदेन सरकार द्वारा घोषित MSP से नीचे न हो।
2). किसानों की आत्महत्याओं पर रोक लगाने हेतु एवम कृषि क्षेत्र की स्थिति सुधारने हेतु 2004 में डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया गया था। जिसने 2006 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। उस रिपोर्ट में किसानों को C2 लागत में 50% जोड़कर MSP देने की सिफारिश की गयी थी। 2006-2014 तक पूपीए की सरकार रही, लेकिन उन्होंने वह रिपोर्ट लागू नहीं की। उसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली बीजेपी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वायदा किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद 2015 में भारत सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में लिखित हलफनामा दिया कि वे इस रिपोर्ट को लागू नहीं कर सकते। क्योंकि इसे लागू करने से सरकार का वित्तीय बजट बिगड़ जाएगा। 2018 में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल एवम सामाजिक नेता अन्ना हजारे ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कराने के लिए दिल्ली में अनशन किया था। जिसके बाद भारत सरकार ने 6 महीने में उस रिपोर्ट को लागू करने का लिखित वायदा आंदोलनकारी किसानों के साथ किया। लेकिन उसके बावजूद उस रिपोर्ट के C2+50% फॉर्मूले को आज तक लागू नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री से निवेदन है कि स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के तहत फसलों का MSP घोषित किया जाए।
3). किसानों का सम्पूर्ण कर्ज माफ किया जाए। क्योंकि सरकारों द्वारा फसलों पर उचित MSP विन्सानों को न दिए जाने की वजह से किसान कर्जदार हुए हैं। OECD की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारों द्वारा घोषित MSP न मिलने की वजह से 2000-17 के मध्य किसानों को 45 लाख करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ है, OECD की ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा घोषित MSP न मिलने की वजह से 2022-23 में किसानों को 12.55 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी तरफ 2022 में एक प्रश्न का जवाब देते हुए भारत सरकार के मंत्री भागवत कराड़ ने संसद में बताया कि 2020-21 में भारत के किसानों पर बकाया ऋण 18.4 लाख करोड़ रुपये है।
4). 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून पुनः लागू किया जाए, जिसके तहत जमीन अधिग्रहण करने से पहले 75% किसानों की लिखित सहमति ली जाने, किसानों को कलेक्टर रेट से 4 गुणा मुआवजा देने एवम प्राथमिकता के तौर पर बंजर भूमि का अधिग्रहण करने जैसे प्रावधानों को पुनः लागू किया जाए। 5). गन्ने का FRP कम से कम 600 रुपये/क्विंटल घोषित किया जाए एवम माननीय इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेशानुसार 14 दिनों में किसानों को गन्ने की भुगतान सुनिश्चित करायी जाए और ऐसा न होने की स्थिति में किन्सानों को 12-15% का ब्याज अतिरिक्त भुगतान के तौर पर दिया जाए। 6). जलवायु परिवर्तन एवम प्राकृतिक आपदाओं की वजह से सूखे और बाढ़ जैसी घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हैं, जिनसे किसानों को बहुत नुक्सान हो रहा है। जलवायु परिवर्तन व प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को हो रहे नुक्सानों की भरपाई के लिए सरकार को राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए। सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान फसल बीमा योजना से किसानों को फायदा होने की बजाय कॉरपोरेट घरानों को फायदा हो रहा है इसलिए वर्तमान फसल बीमा योजना में व्यापक बदलाव कर के किसान हितैषी प्रावधान शामिल करने की जरूरत है।
7). बिजली की हाईटेंशन लाइनों के उचित मुआवजे के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई जाए, जिसके तहत मार्किट वैल्यू का 4 गुणा मुआवजे के तौर पर पीड़ित किसानों को दिया जाए।
8). बीज बिल एवम विद्युत संशोधन बिल में किसानों से सम्बंधित कोई भी प्रावधान किसानों की व्यापक सहमति के बगैर लागू न किये जायें। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों में कृषि, डेयरी एवम पोल्ट्री सेक्टरों को शामिल न किया जाए। 19 मार्च को दिल्ली सभी किसानों के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रधानमंत्री को सौंपेंगे।

