
नर्मदापुरम / आज 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी। सनातन धर्म में गंगा स्नान का खास महत्व है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्णिमा, संक्रांति, गंगा सप्तमी, गंगा दशहरा और अमावस्या समेत शुभ तिथियों पर गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर मां गंगा, सूर्य देव, महादेव और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। सामान्य दिनों में भी साधक गंगा स्नान करते हैं।
शास्त्रों में वर्णित है कि गंगा स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीं, गंगाजल से देवों के देव महादेव का अभिषेक करने से साधक की हर परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है। मां गंगा की पूजा भक्ति करने से सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है।
कब मनाई जाती है गंगा सप्तमी?
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सनातन धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा धरती पर प्रकट हुई थीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माँ गंगा ने ऋषि जाह्नु ऋषि के कान से पुनर्जन्म लिया था, इसलिए इसे “जाह्नवी जयंती” भी कहा जाता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व होता है। वहीं इस साल गंगा सप्तमी पर गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
उदया तिथि का महत्व
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हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार साल 2026 में सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
मां गंगा को समर्पित है यह दिन
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गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर साधक सबसे पहले गंगा स्नान करते हैं। इसके बाद देवी मां गंगा और महादेव की पूजा करते हैं। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गंगा नदी के तट पर मेला का आयोजन किया जाता है। साथ ही संध्याकाल में गंगा आरती की जाती है।
गंगा सप्तमी कब है?
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साल 2026 में सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त
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पंचांग के अनुसार इस दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 20 मिनट से सुबह 05 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में गंगा स्नान करना बेहद शुभ होगा। वहीं गंगा पूजन के लिए मध्यान्ह का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में गंगा माता का पूजन करना बेहद शुभ होगा।
गंगा सप्तमी के शुभ योग
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वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही रवि और शिववास योग का भी संयोग है। रवि योग में गंगा स्नान करने से साधक को सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलेगी। वहीं, शिववास योग में गंगा स्नान कर देवों के देव महादेव की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।
गंगा सप्तमी की कथा
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पौराणिक कथा के अनुसार, राजा सगर ने युद्ध में मारे गए अपने पुत्रों को मोक्ष के लिए कठोर तपस्या कर गंगा को धरती पर अवतरित करवाया था। गंगा नदी का वेग इतना ज्यादा था। कि उससे पूरी पृथ्वी का संतुलन बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया था। ऐसे में भगवान शिव ने गंगा नदी का अपने जटाओं में धारण कर लिया और नियंत्रित रूप से धरती पर अवतरित होने दिया। भगवान शिव ने गंगा नदी को वर्ष वैशाख के माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि अपनी जटाओं में धारण किया था। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई थीं। (संकलन – प्रीति चौहान)

