छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म का था मामला
पुलिस अधीक्षक ने निरीक्षण कर दिए थे कार्रवाई के निर्देश
नकुल मालवीय सिवनी मालवा।
सिवनी मालवा के समीपस्थ ग्राम नयापुरा में 2 जनवरी को एक छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इसको लेकर आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
माननीय प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिवनी मालवा श्रीमति तबस्सुम खान ने आरोपी अजय वाडिवा पिता हेमराज वाडिवा उम्र 30 साल निवासी ग्राम खल खारदा सिवनी मालवा के अपराध क्रमांक 02/2025 धारा 137(2) बीएनएस 103(1),65(2),66 बीएनएस,5(एम)/6 पास्को एक्ट में मृत्युदण्ड से दण्डित किया गया।
यह था पूरा मामला
2 जनवरी को रात थाना सिवनी मालवा की डायल 100 को ग्राम नयापुरा से एक छोटी बच्ची उम्र 6 वर्ष के गुम होने की सूचना प्राप्त हुई थी । जिसे मौके पर पहुंचकर डायल 100 के आर. 65 राहुल कौशल द्वारा परिजनों के साथ घर के आस पड़ोस में बच्ची की तलाश की गई। जिसके उपरांत परिजन द्वारा संदेही अजय आदिवासी पर व्यक्त करने पर गुम इंसान 04/25 दर्ज किया गया तथा गुमशुदा नाबालिग होने एवं संदेही अजय आदिवासी के द्वारा बच्ची अपहरण करने के संदेह पर अप. क्र. 02/25 धारा 137 (2) बीएनएस का कायम कर विवेचना में लिया गया। प्रकरण की प्रकृति गंभीर होने पर डॉ. गुरुकरन सिंह एवं एसडीओपी सिवनी मालवा राजू रजक द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण किया गया एवं संदेही को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने व प्रकरण मे भौतिक साक्ष्य संकलित करने के निर्देश दिये गए। वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देश में घटना स्थल का एफएसएल अधिकारी से निरीक्षण कराकर घटना स्थल से भौतिक साक्ष्य एकत्रित किये गए। विवेचना थाना प्रभारी निरी. श्री अनूप उईके द्रवारा की गई। पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित टीम दद्वारा आरोपी अजय वाडिवा पिता हेमराज वाडिवा उम्र 30 साल निवासी ग्राम खल खारदा सिवनी मालवा को 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया। थाना सिवनी मालवा द्वारा महज 10 दिवस में मामले में अनुसंधान कर अभियोग पत्र मान एडीजे न्यायालय सिवनी मालवा के समक्ष प्रस्तुत किया गया था जिसमें परिजन, स्वतंत्र साक्षी एवं अन्य साक्षी मिलाकर कुल 41 अभियोजन साक्षियों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था। 2 माह 28 दिन के अंदर ट्रायल पूर्ण कर 11 अप्रैल को आरोपी अजय वाडिवा सभी धाराओं में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा से दंडित किया गया है। विगत 3 वर्षों में नर्मदापुरम पुलिस द्वारा तीसरी बार इस तरह की घटना में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी को मृत्युदंड की सजा से न्यायालय द्वारा दंडित किया गया है।
मृतक पीड़िता के संबंध में अंतिम बहस में प्रस्तुत पंक्तियां…
वौ छोटी सी बच्ची थी, ढंग से बोल ना पाती थी । देख के जिसकी मासूमियत, उदासी मुस्कान बन जाती थी। जिसने जीवन के केवल , पांच बसंत ही देखे थे । उसे पर यह अन्याय हुआ ,यह कैसा विधि के लेख थे। एक 6 साल की बच्ची पे ,यह कैसा अत्याचार हुआ। एक बच्ची को बचा सके ना, कैसा मुल्क लाचार हुआ। उस बच्ची पर जुल्म हुआ, वह कितनी रोई होगी। मेरा कलेजा फट जाता है, तो उसे बच्ची की मां कैसे सोयी होगी| जिस मासूम को देखके मन में प्यार उमड आता है। देख उसी को मन में कुछ के, हैवान उतर क्यों जाता है। कपड़ों के कारण होते रेप , जो कहे उन्हें बताऊं मैं | आखिर 6 साल की बच्ची को ,साड़ी कैसे पहनाऊं में । मगर अब भी हम ना सुधरे तो, एक दिन ऐसा आएगा | इस देश को बेटी देने में ,भगवान भी घबराएगा ।

