



सोहागपुर / शिक्षा जगत में कुछ अवसर ऐसे होते हैं, जब सेवानिवृत्ति केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रह जाती, बल्कि समाज के लिए सम्मान, स्मृति और आत्ममंथन का क्षण बन जाती है। ऐसा ही दुर्लभ और गौरवपूर्ण अवसर शासकीय गांधी माध्यमिक शाला, सोहागपुर की सहायक शिक्षिका श्रीमती नीता शर्मा के 31 जनवरी 2026 को 37 वर्षों की शासकीय सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर देखने को मिला। आयोजित विदाई समारोह में विद्यालय परिवार, विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि और समाज के गणमान्य नागरिकों की भावुक उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह विदाई नहीं, एक अमिट विरासत का सार्वजनिक सम्मान है। समारोह में बीआरसीसी राकेश रघुवंशी, संकुल प्राचार्या, जनशिक्षक, प्रधान पाठक अभिलाषा मीणा, पूर्व विधायक एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष पिपरिया राजेंद्र सिंह राजपूत सहित नगर व क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहे। पूर्व विधायक श्रीमती सविता दीवान, पंडित आदित्य पलिया, श्रीमती आरती अर्जुन पलिया, पुष्पराज सिंह पटेल, संतोष मालवीय, कन्नूलाल अग्रवाल, माधव सिंह चौधरी, मंगल रघुवंशी, हामिर सिंह चंदेल, शेर खान, कैलाश पालीवाल, राजकुमार रघुवंशी, प्रशांत जायसवाल और सुधीर ठाकुर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता व नागरिकों ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। अतिथियों ने अपने संबोधनों में कहा कि किसी शिक्षक की पहचान पद या सेवा अवधि से नहीं, बल्कि उसके द्वारा गढ़ी गई पीढ़ियों और समाज पर छोड़े गए प्रभाव से होती है। श्रीमती नीता शर्मा का शिक्षण योगदान केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, उनकी कक्षा चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला बनी, जहाँ अनुशासन, नैतिकता, परिश्रम और आत्मसम्मान को पढ़ाया नहीं, जिया गया। वे विद्यार्थियों के लिए विषय की शिक्षिका भर नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, संरक्षक और प्रेरणा स्रोत रहीं। 37 वर्षों की इस शिक्षण यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि वे सैकड़ों विद्यार्थी हैं, जो आज प्रशासन, सरकारी सेवाओं, विधि क्षेत्र, निजी कंपनियों और सामाजिक नेतृत्व में अपनी पहचान बना चुके हैं। अनेक ऐसे छात्र भी रहे, जिनकी शिक्षा परिस्थितियों के कारण रुक सकती थी, पर उनकी संवेदनशीलता और दृढ़ विश्वास ने उन्हें मुख्यधारा तक पहुँचाया। बदलती शिक्षा नीतियों और पीढ़ियों के बीच भी उन्होंने अपने मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया, यही कारण है कि उनके विद्यार्थियों में शैक्षणिक योग्यता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टि स्पष्ट दिखती है। श्रीमती नीता शर्मा का व्यक्तित्व उस संस्कारशील परंपरा का प्रतिबिंब है, जहाँ शिक्षा और कानून को सेवा का माध्यम माना जाता है। उनके धर्मपति बी. के. शर्मा नगर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं और परिवार की पहचान सादगी, सांस्कृतिक मूल्यों व सामाजिक सहभागिता से जुड़ी रही है। विदाई के अवसर पर आयोजित स्वरुचिभोज और सम्मान समारोह केवल पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि उस विचारधारा का सार्वजनिक सम्मान था, जिसमें शिक्षक को समाज का निर्माता माना जाता है। समारोह का समापन इस भाव के साथ हुआ कि यह विदाई सेवा का अंत नहीं, बल्कि उस सतत विरासत की निरंतरता है, जो श्रीमती नीता शर्मा के शिक्षण से समाज में स्थायी रूप से अंकित हो चुकी है। सोहागपुर ने आज एक शिक्षिका को नहीं, शिक्षा को नमन किया।

