
ग्वालियर / श्रीमती वंदना राज पांडे, अनन्यतः विशेष न्यायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम एवं त्रयोदशम् जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट जिला ग्वालियर द्वारा आरोपी सूरज गौंड हजीरा, ग्वालियर म.प्र. सत्र प्रकरण कंमांक एससी 251/2024 धाराः धारा-115 (2) भा.न्या सं. में 6 माह का कठोर कारावास एवं 600 रूपये व्यतिकम में 1 माह का कठोर कारावास एवं धारा 7 सहपठित धारा 8 पॉक्सो अधिनियम 2012 में 3 वर्ष का कठोर कारावास, 2,000 रूपये अर्थदण्ड व्यतिक्रम में 6 माह का कठोर कारावास एवं पीडिता को 2500 रूपये प्रतिकर एवं सहायता राशि प्रदान करने हेतु आदेशित किया गया है। अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक गायत्री गुर्जर सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी जिला ग्वालियर ने घटना के बारे में बताया कि अभियोक्त्री दिनांक 16.11.2024 को सुबह 07:30 बजे अपने घर से स्कूल आर.एस. कॉन्वेंट हायर सेकेन्डरी में पढ़ने के लिए घर से निकली थी स्कूल के लिए वह लेट हो गई और स्कूल के गेट बंद होने के कारण वह अपने घर वापस लौटने लगी, तभी रास्ते में सूरज गौड और उसका दोस्त खड़े हुए मिले। सूरज को वह पहले से जानती थी क्योंकि जहां पर वह लोग किराए से रहते थे वहां पर सूरज गौड भी रहता था। सूरज गौड ने उससे कहा कि पहले किला घूमने चलते थे फिर मैं तुम्हें घर छोड़ दूंगा। वह सूरज को पहले से जानती थी इसलिए उसके साथ स्कूटी पर बैठकर चली गई। किला गेट पर वह लोग नीचे खड़े थे। उसने किले के उपर जाने से मना कर दिया तो सूरज उसे किले पर जाने के लिए जबरदस्ती करने लगा और उसके साथ छेडखानी कर उसके चेस्ट को टच कर उसे बेड टच किया। उसने सूरज से कहा कि उसे घर छोड़ दो नहीं तो मैं चिल्लाउंगी तब सूरज ने उसे गाल पर थप्पड़ मारे और सूरज के दोस्त ने उसे अपनी बेल्ट निकालकर दी। जिससे सूरज ने उसकी पीठ पर मारपीट की और फिर उसे वापस स्कूल के पास छोड़ कर चले आए। उसने घर आकर सारी बात अपने माता पिता को बताई। अभियोक्त्री ने आवेदन पत्र प्रस्तुत कर उक्त घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना हजीरा में लेख कराई जो थाना हजीरा के अपराध कं. 497/2024 अंतर्गत धारा-7 5, 115(2), 3 (5) भा.न्या.सं. एवं धारा-7/8 पॉक्सो अधिनियम 2012 के अधीन अभियुक्त सूरज गौड के विरूद्ध पंजीबद्ध की गई। विवेचना के दौरान अभियोक्त्री, अभियोक्त्री के माता-पिता के कथन लेखबद्ध किए गए। अभियोक्त्री के न्यायालय में धारा-183 बी.एन.एस.एस. के कथन लेखबद्ध कराए। घटनास्थल का नक्शा मौका तैयार किया गया। अभियोक्त्री का चिकित्सा परीक्षण कराया गया। अभियोक्त्री की आयु के संबंध में उसका जन्म प्रमाण पत्र जप्त किया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

