
नर्मदापुरम / देशभक्ति के उल्लास और तिरंगे की आन-बान-शान के बीच नर्मदापुरम के पुलिस ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह विवादों के घेरे में आ गया है। आयोजन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के परिणामों को लेकर ‘पक्षपात’ के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (जमराती) की छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
*मेहनत पर भारी पड़ा ‘पक्षपात’*
जमराती स्कूल की छात्राओं ने पिछले एक महीने से दिन-रात मेहनत कर एक प्रेरणादायक नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुति तैयार की थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ग्राउंड पर इन बालिकाओं का प्रदर्शन सराहनीय था। हालांकि, जब परिणामों की घोषणा हुई, तो छात्राओं के हाथ एक बार फिर खाली रहे।
अभिभावकों का आरोप है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है; पिछले 5 वर्षों से इस स्कूल के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। छात्राओं का कहना है कि वे हर साल बेहतर तैयारी के साथ आती हैं, लेकिन निर्णायक समिति (Jury) के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण उन्हें कभी उचित सम्मान नहीं मिला।
*नियमों की अनदेखी, तिरंगे के अपमान पर भी मौन रही समिति*
इस पूरे विवाद में सबसे चौंकाने वाला तथ्य परेड के दौरान सामने आया। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान एक अन्य स्कूल का झंडा नीचे गिर गया था। प्रोटोकॉल और अनुशासन के लिहाज से यह एक बड़ी चूक मानी जाती है, जिसे निर्णायक समिति को गंभीरता से लेना चाहिए था। बावजूद इसके, उस विद्यालय के प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया गया, जबकि अनुशासित और त्रुटिहीन प्रस्तुति देने वाली जमराती स्कूल की छात्राओं को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
“जब निर्णायक समिति ही पक्षपाती हो जाए, तो बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना खत्म हो जाती है। यह केवल एक पुरस्कार की बात नहीं, बल्कि उन सैकड़ों बच्चियों के आत्मसम्मान और मेहनत का सवाल है जो शासकीय स्कूलों में पढ़ती हैं।” — एक व्यथित अभिभावक
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग..
समारोह में प्रदेश के मंत्री और विधायक जैसे गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उनकी मौजूदगी में हुए इस कथित भेदभाव ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि:
* निर्णायक समिति द्वारा दिए गए अंकों की जांच की जाए।
* भविष्य में ऐसी समितियों में निष्पक्ष विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
* पक्षपात करने वाले जिम्मेदार लोगों पर कड़ा एक्शन लिया जाए ताकि बच्चों का मनोबल न गिरे।
यह मामला अब सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या संज्ञान लेता है।

