
नर्मदापुरम / शहर के शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मामला सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति में कॉलेज प्रबंधन द्वारा बरती जा रही कथित मनमानी और पक्षपात का है। कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए एक लैब टेक्नीशियन को जनभागीदारी मद के माध्यम से दोबारा सेवा में रख लिया गया है, जिस पर अब उंगलियां उठने लगी हैं।
*जनप्रतिनिधि के विरोध को भी किया दरकिनार*
सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन श्री राम सराठे की इस पुनर्नियुक्ति पर स्थानीय विधायक ने पहले ही कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। विधायक द्वारा कॉलेज प्रबंधन को स्पष्ट रूप से ऐसी किसी भी नीति-विरुद्ध नियुक्ति न करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, पिछले छह महीनों से उक्त कर्मचारी नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विधायक के निर्देशों की अवहेलना प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। महाविद्यालय के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जब किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को इस तरह दोबारा नियुक्ति दी गई है। अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने इस पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका तर्क है कि जब पूर्व में कई कर्मठ कर्मचारी रिटायर हुए, तब उनके लिए ऐसे कोई नियम नहीं थे। तो फिर श्री सराठे के लिए नियमों को शिथिल क्यों किया गया?
*हितों के टकराव का आरोप*
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि श्री राम सराठे सेवानिवृत्ति से पूर्व लंबे समय तक जनभागीदारी प्रभारी क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। ऐसे में उसी विभाग द्वारा उनकी पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव पारित करना नैतिक रूप से गलत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। कॉलेज प्रबंधन की इस कथित मनमानी के खिलाफ अब प्रशासनिक और उच्च स्तर पर जांच की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि ऐसी नियुक्तियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह भविष्य के लिए एक गलत नजीर पेश करेगी। अब देखना यह है कि क्या उच्च शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या कॉलेज प्रबंधन की यह ‘जुगाड़’ नीति जारी रहती है।

