

नर्मदापुरम / ईशान परिसर में विगत सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह का आज भंडारे के साथ विश्राम हुआ ।विश्राम दिवस की कथा सुनाते हुए आचार्य पुष्कर परसाई ने कहा कि सहज सरल व्यक्ति को परमात्मा की प्राप्ति शीघ्र ही हो जाती है, जरुरी नहीं कि दिन भर माला लेकर बैठा जाये । नवधा भक्ति की नौवी भक्ति भी सरलता सहजता निष्कपटता प्रतिपादित करती है । यदि हम जीवन भर निष्कपट होकर जीवन जियें तो भी परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है। इसके पूर्व आचार्य जी ने भौमासुर, शिशुपाल व जरासंध के वध की कथा सुनाई ।सुदामा चरित्र सुनाते हुए आचार्य श्री ने बताया कि सुदामा गरीब अवश्य थे किन्तु दरिद्र नहीं थे । दरिद्र तो वह होता है जिसकी तृष्णा विशाल हो । जिसकी जीवन भर आकांषाएं पूरी न हों वह दरिद्र होता है ।सुदामा तो ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मण थे । उन्होंने अयाची व्रत धारण किया था ।परमात्मा सबकुछ देता है है किन्तु वह देते हुए दिखाई नहीं देता ।भगवान् ने सुदामा को सब कुछ दिया उसे दो लोकों की संपत्ति दे दी परंतु सुदामा को पता भी नहीं चला कि वह दो लोकों का स्वामी बन गया । इसके पश्चात सप्तदिवासीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ पूर्णाहुति व भंडारे के साथ सम्पन्न हुआ । आयोजक अतुल दीवान एवं अमित दीवान ने सभी पधारे हुए भक्तवृन्द श्रोताओं के आभार व्यक्त किया।

