
नर्मदापुरम / सेमरी, हरचंद, पथरई, परसवाड़ा और जालौन ग्रामों के सैकड़ों ग्रामीण आज भी उस हालात में जीने को मजबूर हैं, जहां रोज़मर्रा का आवागमन जान जोखिम में डालकर करना पड़ता है। मारू नदी पर बने रेलवे पुल के नीचे से गुजरना इन ग्रामीणों की मजबूरी है। अंडरब्रिज के अभाव में बरसात के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे संपर्क टूट जाता है और लोग खतरे के बावजूद उसी रास्ते से निकलने को मजबूर होते हैं। वर्षों से यह समस्या सभी संबंधित विभागों के संज्ञान में होने के बावजूद आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जा सका है। इस गंभीर मुद्दे के साथ-साथ सोहागपुर–बनखेड़ी क्षेत्र की रेल यात्री सुविधाओं की बदहाली भी एक बार फिर सामने आई है। वर्षों से लंबित समस्याओं, लगातार उपेक्षा और ठोस निर्णयों के अभाव से परेशान नागरिक संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल अपर महाप्रबंधक से मिला। हालांकि, इस औपचारिक मुलाकात में सामने आए तथ्य यह संकेत देते हैं कि रेलवे प्रशासन के साथ-साथ क्षेत्रीय नेतृत्व की सक्रियता भी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है। संघर्ष समिति के संयोजक शिवकुमार पटेल ने बताया कि सोहागपुर और बनखेड़ी रेलवे स्टेशन पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एक भी यात्री ट्रेन उपलब्ध नहीं है। यह वही समय है जब मजदूर, किसान, छात्र, मरीज और छोटे व्यापारी सबसे अधिक यात्रा करते हैं। इसके बावजूद रेलवे की समय- सारिणी इस पूरे समयखंड में आम यात्रियों की जरूरतों से पूरी तरह कटी हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों में गहरी नाराजगी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1986–87 से नगर के रेलवे समपार गेट पर ओवरब्रिज अथवा अंडरब्रिज निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन लगभग चार दशक बाद भी यह मांग केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित है। हर साल दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और घंटों जाम लगना आम बात हो चुकी है, फिर भी कोई स्थायी समाधान जमीन पर नजर नहीं आता।
रेलवे स्टेशन की हालत भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों के कोच की जानकारी देने वाले डिस्प्ले बोर्ड आज तक नहीं लगाए गए हैं। प्लेटफॉर्म की ऊंचाई मानकों से कम होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को रोज़ाना जोखिम उठाना पड़ता है। टीन शेड, बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी यात्री सुविधाएं बदहाल स्थिति में हैं, जबकि सुधार के दावे वर्षों से दोहराए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने 22187/88 इंटरसिटी एक्सप्रेस, 12061/62 जनशताब्दी एक्सप्रेस, 22177/78 महानगरी एक्सप्रेस और 12295/96 संघमित्रा सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग भी रखी। इन ट्रेनों का ठहराव क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है, लेकिन लंबे समय से इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाना स्थानीय जरूरतों की उपेक्षा को दर्शाता है। इन सभी मुद्दों को ज्ञापन के माध्यम से अपर महाप्रबंधक के समक्ष रखा गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ज्ञापन, बैठकें और आश्वासन अब औपचारिकता बन चुके हैं, जबकि जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल में संघर्ष समिति संयोजक शिवकुमार पटेल के साथ अल्ताफ खान, नोशीन खान, शुभम गुर्जर, विकास सिंह ठाकुर और दीपक राव उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर यह पूरा घटनाक्रम रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली के साथ-साथ क्षेत्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और यात्रियों की अपेक्षा है कि दशकों से उपेक्षित इन मुद्दों पर अब गंभीरता दिखाई जाए, अन्यथा बढ़ता असंतोष आने वाले समय में व्यापक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

