
नर्मदापुरम / राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने आज संसद के उच्च सदन में मध्यप्रदेश में गहराते जल-संकट और तेजी से गिरते भू-जल स्तर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के कई जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। सांसद नारोलिया ने केंद्रीय भू-जल बोर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि नर्मदापुरम, भोपाल, विदिशा, सागर, छिंदवाड़ा सहित अनेक जिले लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक अर्ध-संकटग्रस्त श्रेणी में पहुंच चुके हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि भू-जल संकट के प्रमुख कारणों में अनियंत्रित भू-जल दोहन, वर्षाजल-संचयन संरचनाओं की कमी तथा नर्मदा एवं अन्य नदियों के तटों पर प्रदूषण और अवैध रेत-खनन शामिल हैं। इन कारणों से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, किसानों को सिंचाई में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बोअरवेल सूखने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और गर्मियों में लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सांसद माया नारोलिया ने अपने वक्तव्य के माध्यम से जल शक्ति मंत्री से आग्रह किया कि जल- संकटग्रस्त जिलों में ग्राउंड वॉटर एक्शन प्लान को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके साथ ही आर्टिफिशियल रिचार्ज संरचनाएं, स्टॉप-डैम और पुनर्भरण कुओं का निर्माण मिशन मोड में किया जाए। उन्होंने माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन बढ़ाने तथा नदियों पर अवैध रेत-खनन और प्रदूषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। सांसद ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का विषय है।

