

नर्मदापुरम / जिले के केसला विकासखंड के आदिवासी ग्राम बेलाबाड़ा (चीपापुरा) में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा और सूझबूझ का परिचय देते हुए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। स्वास्थ्य टीम के सतत प्रयासों, समय पर उपचार और निरंतर काउंसलिंग से 41 वर्षीय गर्भवती सुनीता पति तुलसीराम चौहान के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब वह दिसंबर माह में सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए तैयार हो रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गर्भवती सुनीता को स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाई रिस्क गर्भावस्था के रूप में चिन्हित किया गया था। वह मॉडरेट एनीमिया से पीड़ित थीं और उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 7.1 था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्राम की आशा कार्यकर्ता श्रीमती सरला प्रधान, सीएचओ दीपिका मालवीय, एएनएम कंचना चौधरी एवं आशा सहयोगी जया साहू ने विशेष निगरानी और देखभाल शुरू की।
स्वास्थ्य टीम ने महिला एवं परिजनों की लगातार काउंसलिंग की और बेहतर उपचार के लिए प्रेरित किया। टीम के प्रयासों से लगभग सात माह की गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन स्तर बढ़कर 8.8 हो गया। इसके बाद भी आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने निरंतर प्रयास जारी रखे।
स्वास्थ्य टीम ने 108 एंबुलेंस के माध्यम से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुखतवा पहुंचाया। यहां 25 सितंबर को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के अंतर्गत एफसीएम (FCM) इंजेक्शन लगाया गया। हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने के कारण चिकित्सकीय सलाह पर महिला को सिविल अस्पताल इटारसी रेफर किया गया, जहां 1 अक्टूबर को रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) सहित आवश्यक जांच एवं उपचार किया गया।
वर्तमान में महिला के स्वास्थ्य में काफी सुधार है और हीमोग्लोबिन का स्तर भी बेहतर हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार महिला के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है, ताकि दिसंबर माह में उसका सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।

