
नर्मदापुरम / पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने करवाचौथ का पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया। पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और चंद्रदेव के दर्शन कर अपने पति की लंबी आयु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
करवाचौथ के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर सोलह शृंगार किया। पूजा के लिए आकर्षक थालियां सजाई गईं और महिलाओं ने भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती तथा करवाचौथ माता की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने करवाचौथ की कथा सुनी और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए व्रत संपन्न किया। चंद्रोदय की प्रतीक्षा के दौरान महिलाओं में पर्व को लेकर उत्साह बना रहा।
प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है करवाचौथ….
मीनाक्षी मिश्रा ने बताया कि करवाचौथ का व्रत भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा एक विशेष पर्व है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना को दर्शाता है। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं। उन्होंने कहा कि करवाचौथ केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करने का अवसर भी है।
उन्होंने बताया कि इस पर्व पर महिलाएं पूरे दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखती हैं और शाम को पूजा-अर्चना करने के बाद चंद्रमा के दर्शन करती हैं। चंद्रदेव को अर्घ्य देने और पति के दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। करवाचौथ का पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
चंद्रदर्शन के बाद किया व्रत का पारण….
रात्रि में चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाओं ने विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित किया और अपने पति की लंबी आयु की कामना की। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। पर्व के दौरान घरों में उत्सव और उल्लास का माहौल रहा। करवाचौथ ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और दांपत्य जीवन में प्रेम एवं विश्वास की महत्ता को उजागर किया।

