

नर्मदापुरम / जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ग्राम खोकसर में शनिवार को भव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और अवधूत दादा गुरु ने सत्संग कर श्रद्धालुओं को मां नर्मदा की महिमा और जीवन के सत्य से अवगत कराया।
सत्संग कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, सांसद दर्शन सिंह चौधरी, विधायक प्रेमशंकर वर्मा, पूर्व विधायक सविता दीवान शर्मा, निवर्तमान मंडी अध्यक्ष राजा भैया पटेल, जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह गुर्जर, अनिल बुंदेला, गब्बर सिंह पटेल, किशोर पटेल, हेमंत पटेल, रितुराज पटेल, सुमित गौर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत समाज और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
गौरीशंकर महाराज का विधान और बदली मनोवृत्ति….
कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गौरीशंकर महाराज का विधान था कि कहां कितना रुकना है। नर्मदा परिक्रमा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि परिक्रमा का पथ तो बदला ही है, सबसे बड़ी बात यह है कि मनोवृत्ति बदली है।
उन्होंने कहा कि पहले परिक्रमा कठिन तपस्या थी, आज सुविधाएं बढ़ गई हैं। परिक्रमा अब कहीं-कहीं पर्यटन जैसी लगने लगी है, इसके मूल भाव को बचाए रखना जरूरी है।
नर का मद हरने वाली है मां नर्मदा…..
मंत्री पटेल ने कहा, “नर का मद हरने वाली मां है नर्मदा। परिक्रमा करते समय अहंकार छूटना चाहिए। जो अहंकार लेकर चलता है, मां उसका अहंकार बीच धार में ही खत्म कर देती है।”
उन्होंने मां नर्मदा की लीलाओं का वर्णन करते हुए एक प्रसंग सुनाया कि कैसे महाराज जी ने बीच नर्मदा में अंग्रेज का अहंकार समाप्त किया था। अंग्रेजों को चमत्कार दिखाने के लिए महाराज जी ने मां नर्मदा से 1000 मोहरें मांग कर दीं, जिसे देखकर अंग्रेजों का अहंकार समाप्त हो गया। ये सिर्फ वाणी नहीं है, यह सत्य है।
अहंकार ही सबसे बड़ी समस्या…..
मंत्री ने कहा कि आज समाज में सबसे बड़ी समस्या अहंकार की धूल है। लोग सत्य के लिए प्रमाण मांगते हैं, जबकि सत्य को प्रमाण की नहीं, प्रणाम की आवश्यकता है।
“यह निर्विकार पथ है, पंथ नहीं। हम साधु बनाने नहीं आए हैं, हम साधुता सिखाने आए हैं।”
उन्होंने कहा कि हमारा देश ऋषि प्रधान देश है, यहां ऋषि-मुनियों को सम्मान दिया जाता है। अगर आप प्रकृति के साथ जियोगे तो मजे में रहोगे और प्रवृत्ति के साथ रहोगे तो कष्ट में रहोगे। कर्म को क्रिया से और क्रिया को विधि से करना चाहिए।
नर्मदा किनारे कोई खाली नहीं लौटता……
नर्मदा किनारे बसे लोगों के आतिथ्य का अनुभव साझा करते हुए मंत्री पटेल भावुक हो गए। उन्होंने बताया, “नर्मदा किनारे बसे नागरिकों के घर से कोई भी परिक्रमावासी खाली नहीं लौटता।”
“मेरी परिक्रमा के दौरान एक महिला मजदूरी करके लौटी थी। बोली- मेरे घर में कुछ नहीं है, मैं अभी खरीद कर लाती हूं, अभी मजदूरी से लौटी हूं। तो मैंने कहा ठीक है मैया, आप हमें कंडे ही दे दो। वही हमारे लिए प्रसाद है।”
उन्होंने कहा कि किसी का भला करोगे तो तप लगेगा। जीवन में गंभीर और धैर्य रखना बहुत जरूरी है।
आहार का संयम है जरूरी……
अपने जीवन में आए बदलाव का जिक्र करते हुए प्रहलाद पटेल ने कहा, “मैं परिक्रमा में जैसा था, अब वैसा नहीं हूं, यह बात मैं स्वीकार करता हूं। परिक्रमा ने मुझे बदल दिया।”
उन्होंने कहा कि विधियां उसी को बताना चाहिए जो आहार का संयम रखता हो। अगर तीन नवरात्रि तक बिना लहसुन-प्याज का सात्विक आहार लेकर देखोगे तो अपने आप अहसास हो जाएगा कि शरीर और मन में कितना परिवर्तन आता है।
हर साल आते हैं खोकसर…..
मंत्री पटेल ने बताया कि वे और उनके अनुज जालम सिंह पटेल, मुन्ना भैया वर्ष में एक बार खोकसर गांव में भोग लगाने और दर्शन करने अवश्य आते हैं। खोकसर से उनका पुराना आत्मीय संबंध है।
कार्यक्रम के अंत में दादा गुरु ने भी अपने आशीर्वचन दिए और श्रद्धालुओं को नर्मदा भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

