
नर्मदापुरम / शहर के रसूलिया क्षेत्र में फौजदार पेट्रोल पंप के सामने विराजमान रसूलिया की महारानी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था पांच दशक से भी अधिक समय से निरंतर बनी हुई है। नवदुर्गा उत्सव समिति के तत्वावधान में यहां प्रतिवर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुकी है। नवरात्र के दौरान माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है।
रसूलिया की महारानी का यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। समिति द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्र में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सप्तमी के अवसर पर विशाल जस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें भक्ति गीतों और देवी आराधना के माध्यम से मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया जाता है। इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों और श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
पांच दशक से निभाई जा रही परंपरा….
समिति के वरिष्ठ सदस्यों और बुजुर्गों के अनुसार, रसूलिया की महारानी की स्थापना की परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। समय के साथ आयोजन का स्वरूप विकसित हुआ है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और सेवा का भाव आज भी बरकरार है। स्थानीय नागरिकों की सहभागिता इस उत्सव को विशेष बनाती है। धार्मिक आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी आपसी सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करती है।
आस्था के साथ सुख-समृद्धि की कामना…..
नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु माता की आराधना कर परिवार, नगर और क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं। देवी दुर्गा और महिषासुर के प्रसंग से अन्याय पर न्याय तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश मिलता है। रसूलिया की महारानी का यह आयोजन धार्मिक आस्था को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

